समयसार (प्राकृत गाथा एवं हिन्दी-अंग्रेजी व्याख्या)

समयसार (प्राकृत गाथा एवं हिन्दी-अंग्रेजी व्याख्या)
Samayasara of Acharya Kundakunda with Hindi Commentary
आचार्य कुन्दकुन्द / अमृतचन्द्र सूरि द्वारा
DevanagariHindipublished226 पृष्ठ
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अध्याय - 10
शब्द ज्ञान नहीं है क्योंकि शब्द कुछ नहीं जानता; इसलिए ज्ञान अन्य है, शब्द अन्य
है, ऐसा जिनेन्द्रदेव कहते हैं।
रूप ज्ञान से भिन्न है -
रूवं णाणं ण हवदि जम्हा रूवं ण याणदे किंचि।
तम्हा अण्णं णाणं अण्णं रूवं जिणा विंति॥
(10-85-392)
रूप ज्ञान नहीं है क्योंकि रूप कुछ नहीं जानता; इसलिए ज्ञान अन्य है, रूप अन्य है,
ऐसा जिनेन्द्रदेव कहते हैं।
वर्ण ज्ञान से भिन्न है -
वण्णो णाणं ण हवदि जम्हा वण्णो ण याणदे किंचि।
तम्हा अण्णं णाणं अण्णं वण्णं जिणा विंति॥
(10-86-393)
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