समयसार (प्राकृत गाथा एवं हिन्दी-अंग्रेजी व्याख्या)
Samayasara of Acharya Kundakunda with Hindi Commentary
आचार्य कुन्दकुन्द / अमृतचन्द्र सूरि द्वारा
पृष्ठ 110, कुल 226 में से
संदर्भ में पढ़ेंअध्याय - 7
सत्तमो णिज्जराधिकारो
SHEDDING OF KARMAS
द्रव्यनिर्जरा का स्वरूप -
उवभोगमिंदियेहिं दव्वाणमचेदणाणमिदराणं।
जं कुणदि सम्मदिट्ठी तं सव्वं णिज्जरणिमित्तं॥ (7-1-193)
सम्यग्दृष्टि जीव इन्द्रियों के द्वारा अचेतन और चेतन द्रव्यों का जो उपभोग करता है,
वह सब निर्जरा का निमित्त है।
The enjoyment of sense-perceived objects - inanimate or
animate - by the right believer leads to the shedding of karmas
(nirjarā).
भावनिर्जरा का स्वरूप -
दव्वे उवभुज्जंते णियमा जायदि सुहं च दुक्खं वा।
तं सुहदुक्खमुदिण्णं वेददि अध णिज्जरं जादि॥ (7-2-194)
परद्रव्यों का (जीव के द्वारा) उपभोग करने पर नियम से सुख अथवा दुःख होता है।
(जीव) उदय में आये हुए उस सुख-दुःख का अनुभव करता है; फिर (वह) निर्जरा
को प्राप्त हो जाता है (झड़ जाता है)।
93