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सर्वकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 295, कुल 310 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 295

पिबन्ति मित्रो अर्यमा तना पूतस्य वरुणः. त्रिषधस्थस्य जावतः.. (७)
हे सोम! परिष्कृत किया हुआ सोमरस तीन बरतनों में रखा हुआ है. मित्र, अर्यमा और
वरुण उस को पीने की कृपा करें. (७)
उतो न्वस्य जोषमा इन्द्रः सुतस्य गोमतः. प्रातर्होतेव मत्सति.. (८)
हे इंद्र! प्रातः जैसे होता यज्ञ में उपासना करने की इच्छा रखते हैं, वैसे ही आप प्रातः
सोमरस को पीने की इच्छा रखते हैं. वह परिष्कृत और गाय के दूध में मिला हुआ रहता है.
(८)
बण्महाँ असि सूर्य बडादित्य महाँ असि.
महस्ते सतो महिमा पनिष्ठम मह्ना देव महाँ असि.. (९)
हे सूर्य! आप महान हैं. हे प्रकाशकर्ता! आप महान हैं. हे स्तुत्य! आप महान हैं. हम
आप की महानता की उपासना करते हैं. आप की महिमा महान है. (९)
बट् सूर्य श्रवसा महाँ असि सत्रा देव महाँ असि.
मह्ना देवानामसुर्यः पुरोहितो विभु ज्योतिरदाभ्यम्.. (१०)
हे सूर्य! आप का यश महान है. देवों में आप विशेष महान हैं. आप तम नाशक,
देवताओं के नेता हैं. आप की ज्योति अमर व सर्वव्यापक है. (१०)
तीसरा खंड
उप नो हरिभिः सुतं याहि मदानां पते. उप नो हरिभिः सुतम्.. (१)
हे इंद्र! आप सोम के स्वामी हैं. आप के घोड़े मनोहर हैं. आप उन घोड़ों के द्वारा इस
यज्ञ में अवश्य ही पधारने की कृपा कीजिए. (१)
द्विता यो वृत्रहन्तमो विद इन्द्रः शतक्रतुः. उप नो हरिभिः सुतम्.. (२)
हे इंद्र! आप सैकड़ों कर्म करने वाले हैं. आप वृत्रहंता हैं. आप अपने घोड़ों से इस यज्ञ
में अवश्य ही पधारने की कृपा करें. (२)
त्व ꣳ हि वृत्रहन्नेषां पाता सोमानामसि. उप नो हरिभिः सुतम्.. (३)
हे इंद्र! आप वृत्रहंता एवं सोमरस पीने के इच्छुक हैं. आप अपने घोड़ों से हमारे यज्ञ में
पधारने की कृपा कीजिए. (३)
प्र वो महे महेवृधे भरध्वं प्रचेतसे प्र सुमतिं कृणुध्वम्.
विशः पूर्वीः प्र चर चर्षणिप्राः.. (४)
हे इंद्र! मनुष्य अपने धन की बढ़ोतरी के लिए आप को सोमरस समर्पित करते हैं. किंतु
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