सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 294, कुल 310 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 294

दूसरा खंड
अग्ने विवस्वदुषसश्चित्र १४ राधो अमर्त्य.
आ दाशुषे जातवेदो वहा त्वमद्या देवाँ उषर्बुधः.. (१)
हे अग्नि! आप अमर, सर्वज्ञाता और सर्वद्रष्टा हैं. आप उषा से अनेक प्रकार का धन
प्राप्त कीजिए. उस धन को आप यजमान को प्रदान करने व विशेष रूप से जाग्रत देवों को
यज्ञ में लाने की कृपा कीजिए. (१)
जुष्टो हि दूतो असि हव्यवाहनो ऽ ग्ने रथीरध्वराणाम्.
सजूरश्विभ्यामुषसा सुवीर्यमस्मे धेहि श्रवो बृहत्.. (२)
हे अग्नि! आप देवदूत, हव्यवाहक व मार्गों के रथी हैं. आप उषा और अश्विनीकुमारों
सहित हमें शक्तिशाली और यशस्वी बनाने की कृपा कीजिए. (२)
विधुं दद्राण १४ समने बहूनां युवान १४ सन्तं पलितो जगार.
देवस्य पश्य काव्यं महित्वाद्या ममार स ह्यः समान.. (३)
हे यजमानो! भले ही कोई कई कार्य करने की क्षमता रखता हो, भले ही कोई कितना
ही अधिक शत्रुनाशक हो, किंतु ऐसे युवा को भी वृद्धावस्था ग्रसित कर लेती है. वृद्धावस्था के
बाद मृत्यु पाने वाला पुनः जन्म पा लेता है. यह सब इंद्र की कृपा से ही संभव है. हमें उन के
इस महान कार्य को बारबार स्मरण करना चाहिए. (३)
शाक्मना शाको अरुणः सुपर्ण आ यो महः शूरः सनादनीडः.
यच्चिकेत्त सत्यमित्तन्न मोघं वसु स्पार्हमूत जेतोत दाता.. (४)
हे इंद्र! आप दृढ़मन, सर्वशक्तिमान व सुपर्ण पक्षी के समान हैं. आप जो ठान लेते हैं,
वही करते हैं. आप शक्तिपूर्वक जो वैभव प्राप्त करते हैं, उसे अपने उपासकों को दे देते हैं.
(४)
ऐभिर्देवे वृष्णया पौ १४ स्यानि येभिरौक्षद्वृत्रहत्याय वज्री.
ये कर्मणः क्रियमाणस्य मह्न ऋते कर्ममुदजायन्त देवाः.. (५)
हे इंद्र! आप मरुद्गणों के सहयोग से पुरुषार्थपूर्ण काम करते हैं. आप वज्रधारी व
वृत्रनाशक हैं. आप शत्रुनाश हेतु जलवृष्टि करते हैं. महान कार्य करने वाले अन्य देवता भी उन
का सहयोग करते हैं. (५)
अस्ति सोमो अय १४ सुतः पिबन्त्यस्य मरुतः. उत स्वराजो अश्विना.. (६)
हे सोम! सोमरस को मरुद्गणों के लिए निचोड़ा गया है. इसे मरुद्गण और
अश्विनीकुमार सुरुचि से पीते हैं. (६)
ebook converter DEMO Watermarks*