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सर्वकोश
सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

सामवेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Samaveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished310 पृष्ठ

पृष्ठ 124, कुल 310 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 124

वसन्त इन्तु रन्त्यो ग्रीष्म इन्तु रन्त्यः.
वर्षाण्यनु शरदो हेमन्तः शिशिर इन्तु रन्त्यः.. (२)
वसंत ऋतु लुभावनी है. ग्रीष्म ऋतु लुभावनी है. वर्षा, शरद, हेमंत और शिशिर ऋतुएं
भी लुभावनी हैं. (२)
सहस्रशीर्षाः पुरुषः सहस्राक्षः सहस्रपात्.
स भूमि ꣳ सर्वतो वृत्वार्त्यतिष्ठद्दशाङ्गुलम्.. (३)
पूर्ण पुरुष हजारों सिरों वाला है. वह हजारों आंखों वाला है, हजारों पैरों वाला है. वह
सारे ब्रह्मांड को घेर सकने में समर्थ है. फिर भी वह बाकी रहता है. (३)
त्रिपादूर्ध्व उदैत्पुरुषः पादो ऽ स्येहाभवत्पुनः.
तथा विष्वङ् व्यक्रामदशनानशने अभि.. (४)
पूर्ण पुरुष तीन पैरों वाला है. वह ऊंचे स्थान पर वास करता है. इस पूर्ण पुरुष से ही
सारा संसार पैदा होता है. चेतन और अचेतन सभी में इसी पूर्ण पुरुष का विस्तार है. यह
विविध स्वरूपों वाला है. यह सर्वत्र व्याप्त है. (४)
पुरुष एवेद ꣳ सर्वं यद्भूतं यच्च भव्यम्.
पादो ऽ स्य सर्वा भूतानि त्रिपादस्यामृतं दिवि.. (५)
भूत, वर्तमान और भविष्य तीनों का कर्ता पूर्ण पुरुष ही है. इस के तीन पैर अमर
स्वर्गलोक में हैं. इस के शेष चौथे चरण में सारे प्राणी हैं. (५)
तावानस्य महिमा ततो ज्यायाँ श्च पूरुषः. उतामृतत्वस्येशानो यदन्नेनातिरोहति.. (६)
पूर्ण पुरुष जड़चेतन और समस्त पृथ्वी से भी विस्तृत (बड़ा) है. वह अमरता का स्वामी
है. अन्न से बढ़ने वाले प्राणियों का भी स्वामी है. (६)
ततो विराडजायत विराजो अधि पूरुषः.
स जातो अत्यरिच्यत पश्चाद्भूमिमथो पुरः.. (७)
उस पुरुष से विराट् (ब्रह्मांड) पुरुष उत्पन्न हुआ. उस से अन्य पुरुष उत्पन्न हुए. उस के
बाद उस ने पशुपक्षियों और अन्य जीवों को उत्पन्न किया. (७)
मन्ये वां द्यावापृथिवी सुभोजसौ ये अप्रथेथाममितमभि योजनम्.
द्यावापृथिवी भवत ꣳ स्योने ते नो मुञ्चतम ꣳ हसः.. (८)
हे स्वर्गलोक और पृथ्वीलोक! आप हमारे पालनहार हैं. हम आप को इसी रूप में
जानते हैं. आप हमारा अपार वैभव बढ़ाइए. हे स्वर्गलोक और पृथ्वीलोक के देवता! आप हमें
सुख दीजिए. आप हमें पापों से दूर कीजिए. (८)
हरी त इन्द्र श्मश्रूण्युतो ते हरितौ हरी.
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