सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य

समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य

Samaj Se Prapt Brahmacharya

दादा भगवान द्वारा

स्रोत: दादा भगवान आराधना ट्रस्ट, 'दादा दर्शन', उस्मानपुरा, अहमदाबाद · दादा भगवान आराधना ट्रस्ट · 2005 (उद्गम)

DevanagariHindipublished482 पृष्ठ

पृष्ठ 79, कुल 482 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 79

२६

समझ से प्राप्त ब्रह्मचर्य (पू)

प्रश्नकर्ता : तो दोनों की ज्ञान की अवस्था एक समान होती है या उसमें अंतर होता है? शादी शुदावाले की और ब्रह्मचर्यावाले की?

दादाश्री : ऐसा है न, ब्रह्मचर्यव्रतवाला कभी भी नहीं गिरता। उसे कैसी भी मुश्किलें आए फिर भी नहीं गिरता। फिर उसे सेफ साइड कहते हैं।

शरीर का राजा कौन?

ब्रह्मचर्य तो शरीर का राजा है। जो ब्रह्मचर्य में रहे, उसका दिमाग तो कैसा सुंदर होता है। ब्रह्मचर्य, वह तो पूरे पुद्गल का सार है।

प्रश्नकर्ता : यह सार असार नहीं हो जाता न?

दादाश्री : नहीं, लेकिन वह सार खत्म हो जाता है, 'यूजलेस' हो जाता है न! जिसमें वह सार रहे, उसकी तो बात ही अलग है न? महावीर भगवान को बयालीस साल तक ब्रह्मचर्यसार था। हम जो आहार लेते हैं, उस सभी के सार का सार, वह वीर्य है, वह एक्स्ट्रैक्ट है। अब एक्स्ट्रैक्ट यदि ठीक से संभालकर रखे तो आत्मा जल्दी प्राप्त होता है, सांसारिक दुःख नहीं आते, शारीरिक दुःख नहीं आते, अन्य कोई दुःख नहीं आते।

प्रश्नकर्ता : लेकिन वह शारीरिक है या उसका आत्मा के साथ भी संबंध है?

दादाश्री : नहीं, आत्मा के साथ कोई संबंध नहीं है, वह शारीरिक है लेकिन अगर यह शरीर स्वस्थ रहेगा तो आत्मा मुक्त हो सकेगा न जल्दी? यह शरीर कमजोर होगा, तो क्रोध-मान-माया-लोभ खड़े हो जाएंगे। उसमें से बंधन होगा।

प्रश्नकर्ता : यानी यदि शारीरिक संपत्ति अच्छी हो, तो क्रोध-मान-माया-लोभ जरा कम उत्पन्न होते हैं, ऐसा?

दादाश्री : हाँ, लेकिन शारीरिक संपत्ति दो प्रकार की। एक