सहजोबाई की बानी: सहज प्रकाश (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सन्त चरनदास शिष्या)
Sahjobai Ki Bani: Sahaj Prakash: Belvedere Press
साध्वी सहजोबाई (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंनाम का अंग ३१
चरनदास हरि नाम को, महिमा कही अपार।
सो सहजो हिरदे धरी, अचल धारना धार ॥१५॥
सहजो सुमिरन कीजिये, हिरदे माहिं दुराय¹।
होठ होठ सूं ना हिलै, सकै नहीं कोइ पाय ॥१६॥
राम नाम यों लीजिये, जानै सुमिरनहार।
सहजो कै कर्तार ही, जानै ना संसार ॥१७॥
बैठे लेटे चालते, खान पान ब्यौहार।
जहाँ तहाँ सुमिरन करै, सहजो हिये निहार ॥१८॥
जागत में सुमिरन करै, सोवत में लौ लाय।
सहजो एकरस ही रहै, तार टूटि नहिं जाय ॥१९॥
आठ पहर सुमिरन करै, बिसरै ना छिन एक।
अष्टादस और चार में, सहजो यही बिसेष ॥२०॥
सहजो सुमिरन सब करैं, सुमिरन माहिं बिबेक।
सुमिरन कोई जानि है, कोटों मद्धे एक ॥२१॥
जन्म मरन बन्धन कटै, टूटै जम की फाँस।
राम नाम ले सहजिया, होय नहीं जग हाँस ॥२२॥
चौरासी के दुख छुटैं, छप्पन नर्क तिरास।
राम नाम ले सहजिया, जम पुर मिलै न बास ॥२३॥
गर्भ बास संकट मिटै, जठर अगिन की आँच।
राम नाम ले सहजिया, मुख सूं बोलो साँच ॥२४॥
सील छिमा संतोष गहि, पाँचो इन्द्री जीत।
राम नाम ले सहजिया, मुक्ति होन की रीत ॥२५॥
काम क्रोध लोभ मोह मद, तजि भज हरि को नाम।
निश्चै सहजो मुक्ति ह्वै, लहै अमरपुर धाम ॥२६॥
(१) छिपाकर, गुप्त।
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