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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished288 पृष्ठ

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२६२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड

विशोत्तरी दशा चक्रराहु१८००
ग्रह वर्ष मास दिनयुव१६००
शुक्र ५ ५ ८शनि१६००
सूर्य ६ ० ०बुध१७०८
चंद्र १० ० ०केतु७००
मंगल ७ ० ०

अंतर्दशा साधन

शुक्र की महादशा केवल ५ व० ५ मा० ८ दि० भोगने को शेष रही है। अब इसमें देखना है, शुक्र के अन्तर्गत कौन ग्रह की अन्तर्दशा भोगने को रही है। शुक्र महादशा की अन्तर्दशा के वर्ष उल्टे क्रम से घटाते जाना चाहिए। अर्थात् अन्त की अन्तर्दशा के वर्ष घटने पर और शेष रहे तो उसके पहिले जो ग्रह हो उस की दशा घटाना, इसी प्रकार जब तक घटते जाते उल्टे क्रम से घटाते जाना चाहिए। जो शेष रहे वहाँ से अन्तर्दशा का समय गिनना चाहिए। शुक्र की अन्तर्दशा में इस प्रकार वर्ष हैं।

देखो अंतर्दशा चक्र—

ग्रह | वर्ष | मास | | प० मा० दि० |
---|---|---|---|---|---
१ शुक्र | ३ | ४ | शुक्र भोग्य वर्ष | ५ ५ ८ |
२ सूर्य | १ | ० | —९ अंत का केतु | १ २ ० | घटाया
३ चंद्र | १ | ८ | शेष | ४ ३ ८ |
४ मंगल | १ | २ | —८ बुध | २ १० ० | घटाया
५ राहु | ३ | ० | शेष | १ ५ ८ |
६ गुरु | २ | ८ | —७ शनि | ३ २ ० | नहीं घटा
७ शनि | ३ | २ | | |
८ बुध | २ | १० | | |
९ केतु | १ | २ | | |
योग | २० | ० | | |

यहाँ उल्टे क्रम से अन्तर्दशा के वर्ष घटाना आरम्भ किया। केतु और बुध के वर्ष घट गये, शनि के वर्ष नहीं घटे। इससे प्रगट हुआ कि शनि की अन्तर्दशा में जन्म हुआ था और शनि की अन्तर्दशा १ व० ५ मा० ८ दि० भोगने को शेष रह गई है।

इसी के अनुसार अन्तर्दशा चक्र बनाया।