सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 105, कुल 288 में से
संदर्भ में पढ़ेंबध्याय १७ : ८७
तिथि वार नक्षत्र के योग=चर योग
योग | रवि. | सोम. | मंगल. | बुध. | गुरु. | शुक्र. | शनि. |
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१ सिद्धि योग | | —
तिथि | जया
(३, ८,
१३) | भद्रा
(२, ७,
१२) | पूर्णा
(५, १०,
१५) | नंदा
(१, ६,
११) | रिक्ता
(४, ९,
१४) | सब दोषों का नाश करता है
२ मृत्यु योग ]
(अग्रमयोग] | नंदा | भद्रा | नंदा | जया | रिक्ता | भद्रा | पूर्णा | घातक है । शुभ कार्य में वजित है ।
३ दग्ध नक्षत्र | भरणी | चित्रा | उ. वा. | धनि. | उ. फा. | ज्ये. | रेवती | शुभकार्यमें वजित।
४ क्रकच योग | ति. १२ | ११ | १० | ९ | ८ | ७ | ६ | तिथि वार मिलकर १३ होने में यह योग होता है शुभ में वजित है
५ सम्बर्तक योग | सप्तमी | — | — | प्रति. | — | — | — | सदा वजित
६ दग्ध योग | ति. १२ | ११ | ५ | ३ | ६ | ८ | ९ |
७ विष योग | ,, ४ | ६ | ७ | २ | ८ | ९ | ७ |
८ हृत्ताशन योग | ,, १२ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
९ यमघंट योग | मघा | विशा. | आर्द्रा | मूल | कृति. | रोहि. | हस्त. | शुभ कार्य, यात्रा में वजित
१० उत्प्रात योग | विशा. | शत. | धनि. | रेवती | रोहि. | पुष्य. | उ. फा. |
११ मृत्यु नक्षत्र | ज्ये. | उ. भा | पू. भा. | भर. | आर्द्रा | मघा | चित्रा. |
१२ यमद्वन्द्व योग | मघा | मूल | कृ. | पू. पा. | रेव. | रोहि. | श्रवण | शुभ कार्य में वजित
| धनि. | विशा. | म. | पुन० | श्रवि. | अनु. | शत. |
१३ चर योग | पू. पा. | आर्द्रा. | वि. | रो. | पुष्य | म. | मूल |
१४ मूसलवज्र योग | भरणी | चि. | उ. वा. | धनि. | उ. फा. | ज्ये. | रेव. |
१५ अमृतसिद्धि,, | हस्त | मृग. | अश्वि | अनु. | पुष्य | रेवती | रोहि. |
१६ सर्वार्थसिद्धि,, | हस्त | अ. | अश्वि | रोहि. | रेवती | रे. | अ. |
| मूल | रोहि. | उ. भा. | अनु. | अनु. | अनु | रोहि. | इन में सब कार्य
| तीनों | मृग. | कृ. | हस्त | अश्वि | अश्वि | स्वा. | की सिद्धि होती है
| उत्तरा | पुष्य. | श्ले | कृ. | पुष्य | पुन. | |
| अश्वि. | अनु. | | मृग. | पुन० | श्रवण | |