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सर्वकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished288 पृष्ठ

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८६ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड

ये योग शुभ कार्य में दक्षित हैं नाम सद्गुण फल होता है। पशुपक्ष की तिथि की दक्षित घटी छोड़कर उसकी शेष घटी ले सकते हैं।

मास तिथि नक्षत्र योग—

योगचैत्रवैशाखजेष्ठअषाढ़श्रावणभादोंकुंवारकार्तिकअगहनपुषमाघफाल्गुन
१ शून्य तिथि दोनोपक्षाकी ८-९१२२-३१-२१०-११७-८४-५५
शून्यतिथि कृष्ण पक्ष१४६५
शून्यतिथि शुक्लपक्ष१३७१४६३-४
२ शून्य नक्षत्रअ. रो.चि. स्वा.च. वा.पू. वा.च. वा.श. रा.पू. भा.म. वि.आर्द्राश. भ.
पुष्यघ. मि.श. रे.कू.चि.अ. ह.मू. ल्ये.
३ शून्य राशिकुंभमीनवृषमि.मे.कन्यावृ.तुलाघनकर्कमकरसिंह
४ मन्वादि तिथिशुक्लशु.शु.शु.कू.शु.शु.शु.शु.शु.शु.शु.
३-१५१४१०-१५३०-८३९१५-१२७१११५
५ युगादि तिथिशुक्ल ३कू. १३शु. ९कू. ३
शैलाद्वापरसप्तशुगकालशुग

शून्य तिथियों को मास दग्ध तिथि भी कहते हैं। शून्य नक्षत्र राशि और मन्वादि तिथि और युगादि तिथि शुभ कार्य में दक्षित हैं,

घन नाशक हैं।