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सर्वकोश
रुद्रयामल तन्त्र (उत्तर तन्त्र - हिन्दी व्याख्या सहित)

रुद्रयामल तन्त्र (उत्तर तन्त्र - हिन्दी व्याख्या सहित)

Rudrayamala Tantra (Uttara Tantra) with Hindi Commentary

भगवान भैरव / पं. रामचरण शर्मा द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished68 पृष्ठ

पृष्ठ 50, कुल 68 में से

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४८ रुद्रयामलतन्त्रम्
स्वाहा । मंत्रेण चांजयेन्नेत्रं सुवर्णस्य शला-
कया ॥ श्वेतवस्त्रेण बध्नीयात् नेत्रे च सुस-
माहितः ॥ १४ ॥
दीप जलानेका और स्थापनाका तथा कज्जलका मंत्र पढकर कज्जल
तैयार कर अंजनका मंत्र पढकर सुवर्णकी शलाकासे अंजन करे, और सफेद
कपडेसे सुंदर तरहसे नेत्र बांधे ॥ १४ ॥
पत्रद्रोणे स्थितंकत्र घृतं दधि विलोकयेत् ॥
तदग्नौ न निर्दहेच्च पुनः स्नानं समाचरेत् ॥ १५ ॥
पत्तोंकी दोनकी में धर देखे तो अग्निमें न जरे, फिर स्नान करे ॥ १५ ॥
कंठाच्च सुशुचिर्भूत्वा फलाहारं दिनद्वयम् ॥
शिरे चैव शिखां बद्ध्वा जपेन्मंत्रं ततः परम् ॥ १६ ॥
कंठसे सुंदर पवित्र होकर फलोंको भोजन करे, दो दिन शिरमें शिखाको
बांध मंत्र जपे ॥ १६ ॥
मंत्रः । ॐ नमो भगवते रुद्राय उलमाहेल
महेल हुलहुल विहल मिमिहुलु मिमिहुल
हर हरजक ऋपूजितें जक्षकूभार्ये सुलोचन
स्वाहा । पूर्वोक्त कालिकांमूर्तिमग्रे स्थाप्य
जपेत्ततः ॥ सूर्योदयादस्तमये जपेच्चैव
दिनद्वयम् ॥ १७ ॥
पहिले कही कालिकाकी मूर्ति बनाके आगे स्थापन करे और सूर्योदयसे
सूर्यास्ततक दोनों दिन जपे ॥ १७ ॥
ततो निर्मुच्य नेत्रे पश्येद्भूभौ निधानकम् ॥
शरत्काले विशेषेण वस्तु सर्वं भुवि स्थितम् ॥ १८ ॥