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सर्वकोश
रुद्रयामल तन्त्र (उत्तर तन्त्र - हिन्दी व्याख्या सहित)

रुद्रयामल तन्त्र (उत्तर तन्त्र - हिन्दी व्याख्या सहित)

Rudrayamala Tantra (Uttara Tantra) with Hindi Commentary

भगवान भैरव / पं. रामचरण शर्मा द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished68 पृष्ठ

पृष्ठ 48, कुल 68 में से

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पृष्ठ 48

४६ रुद्रयामलतन्त्रम्
मंत्रेण मंत्रितं चैव शिरे बद्ध्वा च स्वापयेत् ।।
स्वप्ने तदा देवताश्च वार्त्तां कुर्वंति तेन वा ।। ७ ।।
मूलमें मंत्र है सो जपे, कटु तुंबीकी जड़ और बीज ले और कसौंदीकी
जड़ ले मंत्र जपके शिरपर बाँधके सोवे तो उसके संगस्वप्नमें देवता बातें
करें ।। ६ ।। ७ ।।
मंत्रः । ॐ नमो भगवते रुद्राय कर्णपिशाचाय स्वाहा ।
सर्वांजने सिद्धयेच्च मंत्रमघोरसंज्ञकम् ।।
विनाघोरेण सिद्धिर्न जायते नात्र संशयः ।। ८ ।।
मंत्र पढ़ अंजन करे । सब अंजनोंमें सिद्ध करनेवाला यह अघोर मंत्र है,
विना अघोरके सिद्ध नहीं होती इसमें संशय नहीं है ।। ८ ।।
मृत्कालिकां च निर्माय पूजयेद्धूपदीपकैः ।। ९ ।।
अष्टादशसहस्रं तु जपेन्मंत्रं समाहितः ।।
तदा च सर्वसिद्धिं हि दर्शयेन्नात्र संशयः ।। १० ।।
माटीकी कालिका बनाकर पूजे, धूप दीप देवे, सावधानतासे अठारह
हजार मंत्र जपे तो सब सिद्धि देख पड़े ।। ९ ।। ।। १० ।।
मंत्रः । ॐ बहुरूपे विश्वतेजसे ॐविद्याध-
रमहेश्वरं जपाम्यहं महादेवसर्वसिद्धिप्रदा-
यकम् ।। रुद्राय नमो बहुरूपाय नमो स्व-
रूपाय नमः ततः पूषाय नमः यक्षरूपाय
नमः नुदे नद स्वाहा । इमं मंत्रं पठित्वा च
पूजयेद्गिरिजापतिम् ।। तदा सिद्धिर्भवेच्चैव
महादेवप्रसादतः ।। ११ ।।