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सर्वकोश
रुद्रयामल तन्त्र (उत्तर तन्त्र - हिन्दी व्याख्या सहित)

रुद्रयामल तन्त्र (उत्तर तन्त्र - हिन्दी व्याख्या सहित)

Rudrayamala Tantra (Uttara Tantra) with Hindi Commentary

भगवान भैरव / पं. रामचरण शर्मा द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished68 पृष्ठ

पृष्ठ 43, कुल 68 में से

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पृष्ठ 43

हिन्दीटीकासहितम् ४१
राईसमायाः पुष्पं च तूलेनैवचवर्तिकाम् ॥
तैलेप्रज्वालयेद्दीपंदर्शनाद्यांति मत्कुणाः ॥ ७९ ॥
राई समाके फूल और रुईकी बत्ती बनाके राईके तेलमें भिगोय दीपक
बारे तो देखकर खटमल भाग जाँय ॥ ७९ ॥
अर्जुनस्य च पुष्पं च फलं लाक्षा च वारिजम् ॥
गुग्गुलुः शुक्लसर्पंखामूलं भल्लातकं तथा ॥ ८० ॥
अर्जुनके पुष्प और फल तथा लाख, कमल, गूगल सफेद सरफोकाकी
जड और भिलावा ले ॥ ८० ॥
विडंगं त्रिफला लाक्षा चार्कदुग्धेन धूपयेत् ॥
तदा गेहे न तिष्ठंति मूषका वृश्चिकास्तथा ॥ ८१ ॥
वायविडंग त्रिफला लाख और अर्कदूधका धूप दे तो गृहमें मूसे विच्छू
न रहें ॥ ८१ ॥
मुस्तासर्षपभल्लातकेवाक्षस्य च पुष्पकम् ॥
गुडार्को चैव निर्यासो धूपयेच्चैव मंदिरे ॥ ८२ ॥
मुस्ता सर्षप भिलावा केवाचके फूल गुड अकउड और रार इनकी धूप
गृहमें देवे तो सब मसे विषकीट भाग जांय ॥ ८२ ॥
तदा सर्वे पलायंते मूषका विषकीटकाः ॥
अमिल्ताशं च पर्य्यंके बंधयेद्यांति मृत्कुणाः ॥ ८३ ॥
अमिलतासको पलंगमें लगावे तो खटमल भाग जाँय ॥ ८३ ॥
लाक्षानिर्यासमाषं च सर्षपां चैव रंडकम् ॥
भल्लातकं विडंगं च ह्यर्कबीजंच पुष्करम् ॥ ८४ ॥