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सर्वकोश
रुद्रयामल तन्त्र (उत्तर तन्त्र - हिन्दी व्याख्या सहित)

रुद्रयामल तन्त्र (उत्तर तन्त्र - हिन्दी व्याख्या सहित)

Rudrayamala Tantra (Uttara Tantra) with Hindi Commentary

भगवान भैरव / पं. रामचरण शर्मा द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished68 पृष्ठ

पृष्ठ 28, कुल 68 में से

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पृष्ठ 28

२६ रुद्रयामलतन्त्रम्
यह मंत्र पढ़कर स्वाति नक्षत्रमें उमरीकी लकड़ी ४ अंगुल ले जिसके
भमिमें गाड़े वह शत्रु शीघ्र भाग जाय इसमें विचार नहीं ॥११॥
मंत्रः । गिली स्वाहा ।
भरण्यां च गृहीत्वैव अरुवापाखमुत्तमम् ॥
सप्तवारं च मंत्रेण निचखान गृहे यदा ॥
तदा पलायेद्रिपुश्चनात्र कार्या विचारणा ॥ १२ ॥
भरणी नक्षत्रमें अरुवाकीपाख कीशौनाकी छिपोंका पाख आधा फार
ले सातवार मंत्र पढ़कर जिसके गृहमें गाड़ देय वह रिपु भाग जाय इसमें विचार
नहीं ॥१२॥
मंत्र । ॐ दहदहवन स्वाहा ।
अश्वन्यृक्षे गृहीत्वैव वाज्यस्थिचतुरंगुलम् ॥
सप्तवारं च मंत्रेण निखनेच्च रिपोर्गृहे ॥
सोपि यातो गृहाच्छीघ्रं पलायनपरो भवेत् ॥ १३ ॥
अश्विनी नक्षत्रमें बाजीका हाड़ ४ अंगुल ले सात वार मंत्र पढ़कर शत्रुके
घरमें गाड़ दे तो शत्रु भाग जाय ॥१३॥
मंत्रः ॐ घुंघूतिठःठः स्वाहा ।
अरुवावृक्षस्य पाषमष्टोत्तरशतं हुनेत् ॥
यस्य नाम गृहीत्वैव सोपि भग्नो भवेद्ध्रुवम् ॥ १४ ॥
शौनका एक पाश ले एक सो आठ वार मंत्र पढ़ जिसका नाम लेकर हवन
करे सो भाग जाय ॥१४॥