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सर्वकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 932, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 932

हे ऋजीषी इंद्र! तुमने विष्णु के साथ मिलकर जल को रोकने वाले वृत्र का नाश किया. (२)
तूर्वन्नोजियान्तवसस्तवियान्कृतब्रह्मेन्द्रो वृद्धमहाः.
राजाभवन्मधुनः सोम्यस्य विश्वासां यत्पुरां दर्तृमावत्.. (३)
हिंसकों के हिंसक, परम ओजस्वी, अतिशय बलशाली एवं स्तोताओं को अन्न देने वाले
इंद्र ने सभी पुरियों को विदीर्ण करने वाला वज्र प्राप्त किया, तभी वे मधुर सोम के राजा बने.
(३)
शतैरपद्रन्पणय इन्द्रात्र दशोणये कवयेऽर्कसातौ.
वधैः शुष्णस्याशुषस्य मायाः पित्वो नारिरेचीत्किं चन प्र.. (४)
हे इंद्र! बहुत अन्न देने वाले एवं मेधावी कुत्स से युद्ध करने वाले सौ सेनाओं के साथ
पणि तुम्हारी सहायता के कारण भाग गए. इंद्र ने समस्त शक्तियों वाले शुष्ण असुर के कपटों
को समाप्त करके उसका सभी अन्न छीन लिया. (४)
महो द्रुहो अप विश्वायु धयि वज्रस्य यत्पतने पादि शुष्णः.
उरु ष सरथं सारथये करिन्द्रः कुत्साय सूर्यस्य सातौ.. (५)
शुष्ण असुर जब वज्र लगने से धरती पर गिरा, तब उसकी सब शक्ति नष्ट हो गई. इंद्र ने
सूर्य को प्राप्त करने के निमित्त अपने सारथि कुत्स द्वारा रथ आगे बढ़वाया. (५)
प्र श्येनो न मदिरमंशुमस्मै शिरो दासस्य नमुचेर्मथायन्.
प्रावन्नमीं साप्यं ससन्तं पृणग्राया समिषा सं स्वस्ति.. (६)
गरुड़ इंद्र के लिए नशीला सोम लाए. इंद्र ने भी उपद्रवी नमुचि का शिर मथ डाला एवं
सय के पुत्र निमि नामक ऋषि की सोते समय प्राण रक्षा की. साथ ही उसे धन, अन्न एवं
कल्याणों से युक्त किया. (६)
वि पिप्रोरहिमायस्य दृळ्हाः पुरो वज्रिञ्छवसा न दर्दः.
सुदामन्तद्रेक्णो अप्रमृष्यमृजिश्वने दात्रं दाशुषे दाः.. (७)
हे वज्रधारी इंद्र! तुमने अधिक माया वाले पिप्रु असुर के दृढ़ नगरों को अपने बल द्वारा
तोड़ा था. हे शोभन दान वाले इंद्र! तुमने हव्य देने वाले ऋजिश्व्रा नामक राजा को बाधारहित
धन दिया था. (७)
स वेतसुं दशमायं दशोणिं तूतूजिमिन्द्रः स्वभिष्टिसुम्नः.
आ तुग्रं शश्वदिभं द्योतनाय मातुर्र्न सीमुप सृजा इयध्यै.. (८)
मनचाहा सुख देने वाले इंद्र ने अति धनी वेतसु, दशोणि, तूतूजि, तुग्र एवं इभ नामक
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