ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 85, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंपुत्र, पौत्र व गोरक्षा, पृथिवी का कांपना अजेय, स्तुति ८-११
६७. मित्र व वरुण की स्तुति १-११
उत्तम नियंता, घर मांगना, वश में करने हेतु स्तुति, सत्ययुक्त, जीतना, बल धारण, जल
भरना १-७
मायाहीन, यज्ञहीन को नष्ट करने, अन्य देवों के साथ न चलने व घर देने के लिए
प्रार्थना ८-११
६८. इंद्र व वरुण की स्तुति १-११
सोमरस बनाना, शत्रुहिंसक, रक्षक, बढ़ना, धन व पुत्र प्राप्ति १-६
रक्षित धन हेतु याचना व स्तुति ७-८
अजर वरुण ९
सोमपान हेतु प्रार्थना १०-११
६९. इंद्र व विष्णु की स्तुति १-८
हवि देना १
स्तुतियां प्राप्त होने, उनको सुनने, महान कर्म करने हेतु स्तुति २-५
आधार, नशीला सोम, सदा विजेता ६-८
७०. द्यावापृथ्वी का वर्णन १-६
प्रसिद्ध, पवित्र कर्म वाली, भुवन की निवास १-३
सुख याचना, जल टपकाना, संतान, बल व धन मांगना ४-६
७१. सविता की स्तुति १-६
भुजाएं, द्विपद व चतुष्पद प्राणी १-२
घर की रक्षा, अन्न, आनंद व धन हेतु स्तुति ३-६
७२. इंद्र एवं सोम की स्तुति १-५
भूत निर्माण, प्रार्थना, वृत्रहंता, दूध धारण, कल्याणकारी १-५
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