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सर्वकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 766, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 766

हमें बचाओ. हे देवो! तुम में से कौन धन का दान करता है? (१)
प्र ये धामानि पूर्व्याण्यर्चान्वि यदुच्छान्वियोतारो अमूराः.
विधातारो वि ते दधुरजस्रा ऋतधीतयो रुरुचन्त दस्माः.. (२)
जो देव स्तुतिकर्त्ताओं को प्राचीन स्थान देते हैं, जो दुःखों को पृथक् करते हैं, जो
मूढ़ताहीन हैं एवं अंधकार का नाश करते हैं, वे ही देव विधाता हैं एवं नित्य हमारी इच्छाएं पूरी
करते हैं. सत्यकर्म वाले एवं दर्शनीय वे देव शोभित होते हैं. (२)
प्र पस्त्या३मदितिं सिन्धुमर्कैः स्वस्तिमीळे सख्याय देवीम्.
उभे यथा नो अहनी निपात उषासानक्ता करतामदब्धे.. (३)
हम मित्रता प्राप्त करने के निमित्त सबके द्वारा गंतव्य देवमाता अदिति, सिंधु एवं
स्वस्तिदेवी की मंत्रों द्वारा स्तुति करते हैं. धरती-आकाश हमारी भली-भांति रक्षा करें. रात एवं
दिन के देव हमारी अभिलाषा पूर्ण करें. (३)
व्यर्यमा वरुणश्चेति पन्थामिषस्पतिः सुवितं गातुमग्निः.
इन्द्राविष्णू नृवदु षु स्तवाना शर्म नो यन्तममवद्वरूथम्.. (४)
अर्यमा एवं वरुण हमारे लिए यज्ञ का मार्ग बताते हैं. हविरूप अन्न के स्वामी अग्नि हमें
सुखकर गमन मार्ग दिखाते हैं. इंद्र एवं विष्णु भली प्रकार स्तुतियां सुनकर हमें पुत्र-पौत्रादि
युक्त धन एवं शक्तिसंपन्न रमणीय सुख प्रदान करें. (४)
आ पर्वतस्य मरुतामवांसि देवस्य त्रातुरव्रि भगस्य.
पातपतिर्जन्यादंहसो नो मित्रो मित्रियादुत न उरुष्येत्.. (५)
पर्वत, मरुद्गण तथा भग नामक देव से हम रक्षा की प्रार्थना करते हैं. स्वामी वरुण
मानव संबंधी पाप से हमारी रक्षा करें. मित्र हमारी रक्षा हमको मित्र समझकर करें. (५)
नू रोदसी अहिना बुध्य्नेन स्तुवीत देवी अप्येभिरिष्टैः.
समुद्रं न संचरणे सनिष्यवो घर्मस्वरसो नद्यो३ अप व्रन्.. (६)
हे द्यावा-पृथ्वी! जिस प्रकार धन चाहने वाला व्यक्ति सागर से उसके मध्य में जाने के
लिए प्रार्थना करता है, उसी प्रकार हम भी इष्ट कार्य पूरा करने हेतु अहिर्बुध्न्य के साथ तुम्हारी
स्तुति करते हैं. वे देव शब्द करती हुई नदियों को बहने योग्य बनावें. (६)
देवैर्नो देव्यदितिर्नि पातु देवस्त्राता त्रायतामप्रयुच्छन्.
नहि मित्रस्य वरुणस्य धासिमर्हामसि प्रमियं सान्वग्नेः.. (७)
देवमाता अदिति अन्य देवों के साथ हमारी रक्षा करें. इंद्र प्रमादहीन होकर हमारा पालन
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