ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 734, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंजाकर उन्हें भग्न कर डाला. हम तुम्हारी उसी शक्ति का बार-बार वर्णन करते हैं. (१०)
ता ते गृणन्ति वेधसो यानि चकर्थ पौंस्या. सुतेष्विन्द्र गिर्वणः.. (११)
हे स्तुतिपात्र इंद्र! तुमने पूर्वकाल में जिन कठोरतापूर्ण कार्यों का प्रदर्शन किया था, सोम
निचोड़ने के पश्चात् विद्वान् लोग उन्हीं का वर्णन करते हैं. (११)
अवीवृधन्त गोतमा इन्द्र त्वे स्तोमवाहसः. एषु धा वीरवद्यशः.. (१२)
हे इंद्र! स्तोत्रों को वहन करने वाले गौतमवंशीय ऋषियों ने तुम्हें अपनी स्तुतियों द्वारा
बढ़ाया है. तुम इन्हें पुत्र-पौत्र वाला अन्न दो. (१२)
यच्चिद्धि शश्वतामसीन्द्र साधारणस्त्वम्. तं त्वा वयं हवामहे.. (१३)
हे इंद्र! यद्यपि तुम बहुत से यजमानों के साधारण देव हो, फिर भी हम तुम्हें बुलाते हैं.
(१३)
अर्वाचीनो वसो भवास्मे सु मत्स्वान्धसः. सोमानामिन्द्र सोमपाः.. (१४)
हे यज्ञ में निवास करने वाले इंद्र! तुम इन यजमानों के सामने आओ. हे सोम पीने वाले
इंद्र! तुम सोमपरूपी अन्न से प्रसन्न बनो. (१४)
अस्माकं त्वा मतीनामा स्तोम इन्द्र यच्छतु. अर्वागा वर्तया हरी.. (१५)
हम स्तुतिकर्त्ताओं की स्तुतियां तुम्हें हमारे पास लावें. अपने हरि नामक दोनों घोड़ों को
हमारे सामने लाओ. (१५)
पुरोळाशं च नो घसो जोषयासे गिरश्च नः. वध्यूरिव योषणाम्.. (१६)
हे इंद्र! तुम हमारे द्वारा पकाए गए पुरोडाश का भक्षण करो. कामी लोग जिस प्रकार
नारी की बात पूरी करते हैं, उसी प्रकार तुम हमारी स्तुति सार्थक करो. (१६)
सहस्रं व्यतीनां युक्तानामिन्द्रमीमहे. शतं सोमस्य खार्यः.. (१७)
हम स्तुतिकर्त्ता इंद्र से हजारों सीखे हुए तेज गति वाले घोड़े तथा सोमरस के सैकड़ों
कलश मांगते हैं. (१७)
सहस्रा ते शता वयं गवामा च्यावयामसि. अस्मत्रा राध एतु ते.. (१८)
हे इंद्र! हम तुम्हारी हजारों और सैकड़ों गायों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं. हमारा
धन तुम्हारे समीप पहुंचे. (१८)
दश ते कलशानां हिरण्यानामधीमहि. भूरिदा असि वृत्रहन्.. (१९)
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