सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 695, कुल 1855 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 695

समान ढोने वाले, यज्ञकर्त्ता के समान उपकारक, भद्र एवं प्रिय तुमको बढ़ाते हैं. (१)
अधा ह्याग्ने क्रतोर्भद्रस्य दक्षस्य साधोः. रथीर्ऋतस्य बृहतो बभूथ.. (२)
हे अग्नि! तुम इसी समय हमारे भद्र, बढ़े हुए, मनचाहे फल देने वाले, सत्य एवं महान्
यज्ञ के नेता हो. (२)
एभिर्नो अर्कैर्भवा नो अर्वाङ्स्व१र्ण ज्योतिः. अग्ने विश्वेभिः सुमना अनीकैः.. (३)
हे सूर्य के समान तेजस्वी तथा समस्त तेजयुक्त व शोभन गमन वाले अग्नि! तुम हमारे
इन पूजनीय स्तोत्रों द्वारा हमारे सामने आओ. (३)
आभिष्टे अद्य गीर्भिर्गृणन्तोऽग्ने दाशेम. प्र ते दिवो न स्तनयन्ति शुष्माः.. (४)
हे अग्नि! हम आज इन स्तुतियों द्वारा तुम्हारी प्रशंसा करते हुए तुम्हें हवि देंगे. तुम्हारी
शुद्ध करने वाली ज्वालाएं सूर्य की किरणों के समान शब्द करती हैं. (४)
तव स्वादिष्ठाग्ने संदृष्टिरिदा चिदह्न इदा चिदक्तोः. श्रिये रुक्मो न रोचत उपाके.. (५)
हे अग्नि! तुम्हारा प्रियतम प्रकाश रात-दिन अलंकार के समान पदार्थों के समीप आकर
शोभा पाता है. (५)
घृतं न पूतं तनूररेपाः शुचि हिरण्यम्. तत्ते रुक्मो न रोचत स्वधावः.. (६)
हे अन्न के स्वामी अग्नि! तुम्हारा शरीर शुद्ध घृत के समान पापरहित है. तुम्हारा शुद्ध
एवं रमणीय तेज अलंकार के समान चमकता है. (६)
कृतं चिद्धि ष्मा सनेमि द्वेषोऽग्न इनोषि मर्तात्. इत्था यजमानादृतावः.. (७)
हे सत्ययुक्त अग्नि! यजमानों द्वारा उत्पन्न होने पर भी चिरंतन तुम निश्चय ही यजमान
के पापों को नष्ट करते हो. (७)
शिवा नः सख्या सन्तु भ्रात्राग्ने देवेषु युष्मे. सा नो नाभिः सदने सस्मिन्नूधन्.. (८)
हे द्योतमान अग्नि! तुम्हारे प्रति हमारी मित्रता एवं बंधुत्व भाव कल्याणकारी हो. यह
भावना देवस्थानों एवं समस्त यज्ञों में हमारा आधार हो. (८)
सूक्त-११ देवता—अग्नि
भद्रं ते अग्ने सहसिन्ननीकमुपाक आ रोचते सूर्यस्य.
रुशद्दृशे ददृशे नक्तया चिदरूक्षितं दृश आ रूपे अन्नम्.. (१)
ebook converter DEMO Watermarks*