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सर्वकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 665, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 665

हे अश्विनीकुमारो! सुंदर पहियों वाले रथ में बैठकर एवं भली प्रकार जुते हुए अश्वों द्वारा
खींचे जाकर तुम दोनों स्तोताओं की स्तुतियां सुनो. मेधावी पुरातन ऋषियों ने क्या तुमसे नहीं
कहा कि तुम दोनों हमारी वृत्ति की हानि मत करो. (३)
आ मन्येथामा गतं कच्चिद्देवैर्विश्वे जनासो अश्विना हवन्ते.
इमा हि वां गोऋजीका मधूनि प्रमित्रासो न ददुरूस्रो अग्रे.. (४)
हे अश्विनीकुमारो! हमारी स्तुति को जानो और अश्वों द्वारा यज्ञ में पधारो. सभी स्तोता
तुम्हें बुलाते हैं. वे मित्रों के समान तुम्हें दूध मिला हुआ एवं मादक सोमरस देते हैं. सूर्य उषा के
आगे उदय होते हैं. (४)
तिरः पुरू चिदश्विना रजांस्याङ्गूषो वां मघवाना जनेषु.
एह यातं पथिभिर्देवयानैर्दसाविमे वां निधयो मधूनाम्.. (५)
हे अश्विनीकुमारो! अनेक लोकों को अपने तेज से तिरस्कृत करते हुए तुम दोनों देवमार्ग
द्वारा यहां आओ. संपत्तिशाली अश्विनीकुमारो! स्तोताओं के पास तुम्हारे लिए बोला जाने
वाला स्तोत्र है. हे शत्रुनाशको! तुम्हारे लिए मदकारक सोमरस के पात्र तैयार हैं. (५)
पुराणमोकः सख्यं शिवं वां युवोर्रनरा द्रविणं जह्नाव्याम्.
पुनः कृण्वानाः सख्या शिवानि मध्वा मदेम सह नू समानाः.. (६)
हे अश्विनीकुमारो! तुम दोनों की पुरानी मित्रता सेवा करने योग्य एवं कल्याण करने
वाली है. हे हमारे यज्ञकर्म के नेताओ! तुम्हारा धन जाह्नवी गंगा में है. तुम दोनों की सुख मैत्री
को बार-बार प्राप्त करते हुए मादक सोमरस से हम भी शीघ्र प्रसन्न हों. (६)
अश्विना वायुना युवं सुदक्षा नियुद्भिश्न सजोषसा युवाना.
नासत्या तिरोअह्नयं जुषाण सोमं पिबतमस्रिधा सुदानू.. (७)
हे शोभन सामर्थ्य से युक्त, नित्य तरुण, असत्यरहित एवं शोभन फल देने वाले
अश्विनीकुमारो! वायु और नियुतों के साथ मिलकर स्थायी प्रेमयुक्त एवं नाशरहित तुम दोनों
दिवस छिपने पर सोम पान करो. (७)
अश्विना परि वामिषः पुरूचीरीयुर्गीर्भिर्यतमाना अमृध्राः.
रथो ह वामृतजा अद्रिजूतः परि द्यावापृथिवी याति सद्यः.. (८)
हे अश्विनीकुमारो! बहुत से हविरूपी अन्न तुम्हारे समीप जाते हैं. तिरस्कारहीन एवं
यज्ञकर्म में संलग्न स्तोता स्तुतियों द्वारा तुम्हारी सेवा करते हैं. स्तोताओं द्वारा खींचा गया
तुम्हारा जल बरसाने वाला रथ धरती-आकाश के बीच में शीघ्र गमन करता है. (८)
अश्विना मधुषुत्तमो युवाकुः सोमस्तं पातमा गतं दुरोणे.
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