ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 661, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंप्रमुख बल एक ही है. (१७)
वीरस्य नु स्वश्व्यं जनासः प्र नु वोचाम विदुरस्य देवाः.
षोळहा युक्ताः पञ्चपञ्चा वहन्ति महद्देवानामसुरत्वमेकम्.. (१८)
हे मनुष्यो! शूर इंद्र के सुंदर घोड़ों का हम शीघ्र भांति-भांति से वर्णन करते हैं. उन्हें
देवगण जानते हैं. वे ऋतुओं के रूप में छः एवं हेमंत, शिशिर के मिलकर एक हो जाने से
पांच अश्वों के रूप में इंद्र को ढोते हैं. देवों का प्रमुख बल एक ही है. (१८)
देवस्त्वष्टा सविता विश्वरूपः पुपोष प्रजाः पुरुधा जजान.
इमा च विश्वा भुवनान्यस्य महद्देवानामसुरत्वमेकम्.. (१९)
सबके प्रेरक एवं नाना रूप धारी त्वष्टा देव प्रजाओं को अनेक प्रकार से उत्पन्न करते हैं
एवं पालते हैं. संपूर्ण भुवन उन्हीं के हैं. देवों का प्रमुख बल एक ही है. (१९)
मही समैरच्चम्वा समीची उभे ते अस्य वसुना न्युष्टे.
शृण्वे वीरो विन्दमानो वसूनि महद्देवानामसुरत्वमेकम्.. (२०)
इंद्र ने विशाल एवं एक-दूसरे से मिले हुए धरती-आकाश दोनों को पशुपक्षियों से पूर्ण
किया है. ये दोनों इंद्र के तेज से पूरी तरह व्याप्त हैं. वीर इंद्र शत्रुओं की संपत्ति छीनने के लिए
प्रसिद्ध हैं. देवों का प्रमुख बल एक ही है. (२०)
इमां च नः पृथिवीं विश्वधाया उप क्षेति हितमित्रो न राजा.
पुरःसदः शर्मसदो न वीरा महद्देवानामसुरत्वमेकम्.. (२१)
विश्व का पालन करने वाले एवं हमारे राजा इंद्र धरती एवं आकाश के समीप रहते हैं.
वीर मरुत् संग्राम में इंद्र के आगे रहते हैं तथा उनके घर में निवास करते हैं. देवों का प्रमुख
बल एक ही है. (२१)
निष्षिध्वरीस्त ओषधीरुतापो रयिं त इन्द्र पृथिवी बिभर्ति.
सखायस्ते वामभाजः स्याम महद्देवानामसुरत्वमेकम्.. (२२)
हे मेघ रूप इंद्र! ओषधियों ने तुमसे सिद्धि पाई है, जल तुम्हीं से निकले हैं एवं धरती
तुम्हारे भोग के योग्य धन को धारण करती है. तुम्हारे मित्र हम धन के भागी बनें, देवों का
प्रमुख बल एक ही है. (२२)
सूक्त—५६ देवता—विश्वेदेव
न ता मिनन्ति मायिनो न धीरा व्रत देवानां प्रथमा धुवाणि.
न रोदसी अद्गुहा वेद्याभिर्न पर्वता निनमे तस्थिवांसः.. (१)
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