ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 634, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंवपूंषि जाता मिथुना सचेते तमोहना तपुषो बुध्न एता.. (३)
यम ने अश्विनीकुमारों को जन्म दिया था. उनकी स्तुति करने के लिए मेरी जीभ का
अगला भाग चंचल है. अंधकारनाशक दिवस के प्रारंभ में ही आए हुए वे अश्विनीकुमार
प्रातःकाल के यज्ञकर्मों से संगत होते हैं. (३)
नकिरेषां निन्दिता मर्त्येषु ये अस्माकं पितरो गोषु योधा:.
इन्द्र एषां दृंहिता माहिनावानुद्गोत्राणि ससृजे दंसनावान्.. (४)
हे इंद्र! गायों के निमित्त युद्ध करने वाले हमारे पितरों का मनुष्यों में कोई भी निंदक नहीं
है. महिमा एवं वृत्रहननादि कर्म वाले इंद्र ने उन अंगिरागोत्रीय ऋषियों को समृद्ध गाएं दी थीं.
(४)
सखा ह यत्र सखिभिर्नवग्वैरभिज्ञ्वा सत्वभिर्गा अनुग्मन्.
सत्यं तदिन्द्रो दशभिर्दशग्वैः सूर्यं विवेद तमसि क्षियन्तम्.. (५)
नवग्व अर्थात् अंगिरागोत्रीय ऋषियों के मित्र इंद्र पणियों द्वारा रोकी गईं गायों वाले बिल
में जब घुटनों के सहारे गए थे, तब दस अंगिराओं के साथ बिल के अंधकार में सूर्य को देख
सके. (५)
इन्द्रोमधुसम्भृतममृतमुस्रियायां पद्वद्विवेद शफवन्नमे गोः.
गुहा हितं गुह्यं गूहळह्मप्सु हस्ते दधे दक्षिणे दक्षिणावान्.. (६)
इंद्र ने सबसे पहले दुधारू गायों में मधुर दूध जाना, फिर दूध के निमित्त चार चरणों वाले
गोधन को प्राप्त किया. उदारता वाले इंद्र ने गुफा में छिपे हुए एवं अंतरिक्ष में चलने वाले
मायावी असुर को दाहिने हाथ में पकड़ लिया. (६)
ज्योतिर्वृणीत तमसो विजानन्नारे स्याम दुरितादभीके.
इमा गिरः सोमपाः सोमवृद्ध जुषस्वेन्द्र पुरुतमस्य कारोः.. (७)
रात्रि से उत्पन्न होते ही सूर्यरूपी इंद्र ने प्रकाश का वरण किया. हम पाप से दूर एवं
भयहीन स्थान में रहेंगे. हे सोम पीने वाले एवं सोम पाने में प्रमुख इंद्र! शत्रुविनाशकारी एवं
स्तुति करने वाले ऋत्विज् की इन स्तुतियों को सुनो. (७)
ज्योतिर्यज्ञाय रोदसी अनु ष्यादारे स्याम दुरितस्य भूरेः.
भूरि चिद्धि तुजतो मर्त्यस्य सुपारासो वसवो बर्हणावत्.. (८)
हे इंद्र! जगत्-प्रकाशक सूर्य यज्ञ के लिए धरती और आकाश को प्रकाशित करें. हम
विस्तृत पाप से दूर रहें. हे स्तुति द्वारा प्रसन्न किए जाने वाले वसुओ! अधिक दान करने वाले
यजमान को पर्याप्त एवं समृद्धिशाली धन दो. (८)
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