सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 591, कुल 1855 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 591

वाला सोमरस तुम्हारे समीप जाता है. इस निचोड़े हुए सोमरस को पिओ. (२)
इन्द्रमग्निं कविच्छदा यज्ञस्य जूत्या वृणे. ता सोमस्येह तृम्पताम्.. (३)
इस यज्ञ के साधनभूत सोमरस की प्रेरणा से मैं स्तोताओं के लिए सुखदाता इंद्र और
अग्नि का वरण करता हूं. वे इस यज्ञ में सोम पीकर तृप्त हों. (३)
तोशा वृत्रहणा हुवे सजित्वानापराजिता. इन्द्राग्नी वाजसातमा.. (४)
मैं शत्रुबाधक, वृत्रनाशक, विजयी, अपराजित एवं अधिक मात्रा में अन्न देने वाले इंद्र
तथा अग्नि को बुलाता हूं. (४)
प्र वामर्चन्त्युक्थिनो नीथाविदो जरितारः. इन्द्राग्नी इष आ वृणे.. (५)
हे इंद्र एवं अग्नि! मंत्र जानने वाले होता आदि तथा स्तोत्रों के ज्ञाता स्तोता तुम्हारी
अर्चना करते हैं. मैं भी अन्न प्राप्त करने के लिए सभी प्रकार से तुम्हारा वरण करता हूं. (५)
इन्द्राग्नी नवतिं पुरो दासपत्नीरधूनुतम्. साकमेकेन कर्मणा.. (६)
हे इंद्र और अग्नि! तुमने एक ही प्रयास में दासों के नब्बे नगरों को कंपित कर दिया था.
(६)
इन्द्राग्नी अपसस्पर्युप प्र यन्ति धीतयः. ऋतस्य पथ्या३ अनु.. (७)
हे इंद्र और अग्नि! सोमरस के पाने वाले होता आदि यज्ञ के मार्ग को देखकर हमारे इस
कर्म के चारों ओर उपस्थित रहते हैं. (७)
इन्द्राग्नी तविषाणि वां सधस्थानि प्रयांसि च. युवोरप्तूर्यं हितम्.. (८)
हे इंद्र और अग्नि! तुम दोनों के बल और अन्न एक-दूसरे से अभिन्न हैं. जल वर्षा की
प्रेरणा का काम आप ही के बीच सीमित है. (८)
इन्द्राग्नी रोचना दिवः परि वाजेषु भूषथः. तद्वां चेति प्र वीर्यम्.. (९)
हे स्वर्ग को प्रकाशित करने वाले इंद्र और अग्नि! तुम युद्धों में सर्वत्र विभूषित बनो. तुम
दोनों की शक्ति युद्ध की विजय का ज्ञान कराती है. (९)
सूक्त—१३ देवता—अग्नि
प्र वो देवायाग्नये बर्हिष्ठमर्चामै. गमद्देवेभिरा स नो यजिष्ठो बर्हिरा सदत्.. (१)
हे होताओ! अग्नि देव को लक्ष्य करके यथेष्ट मात्रा में स्तुति करो. यज्ञकर्त्ताओं में श्रेष्ठ
ebook converter DEMO Watermarks*