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सर्वकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 548, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 548

सीव्यत्वपः सूच्याच्छिद्यमानया ददातु वीरं शतदायमुक्थ्यम्.. (४)
मैं उत्तम स्तुतियों द्वारा आह्वान के योग्य राका देवी को बुलाता हूं. वह सुभगा हमारी
पुकार सुनें एवं हमारा अभिप्राय स्वयं जान लें. वह छेदरहित सूई से हमारे कर्मों को बुनती हुई
हमें वीर एवं बहुदानदाता पुत्र दें. (४)
यास्ते राके सुमतयः सुपेशसो याभिर्ददासि दाशुषे वसूनि.
ताभिर्नो अद्य सुमना उपागहि सहस्रपोषं सुभगे रराणा.. (५)
हे राका देवी! तुम्हारी जो शोभन रूप वाली उत्तम बुद्धियां हैं एवं जिनके द्वारा तुम
यजमान को धन देती हो, आज प्रसन्नचित्त होकर उसी बुद्धि के साथ पधारो. हे सुभगा राका!
तुम हजारों प्रकार से हमारा पोषण करती हो. (५)
सिनीवालि पृथुष्टुके या देवानामसि स्वसा.
जुषस्व हव्यमाहुतं प्रजां देवि दिदिड्ढि नः.. (६)
हे मोटी जंघाओं वाली सिनीवाली! तुम देवों की बहिन हो. हमारा दिया हुआ हव्य
स्वीकार करो एवं संतान दो. (६)
या सुबाहुः स्वङ्गुरिः सुषूमा बहुसूवरी.
तस्यै विशपत््न्यै हविः सिनीवाल्यै जुहोतन.. (७)
जो सिनीवाली सुंदर बाहुओं एवं सुंदर उंगलियों वाली, शोभन पुत्रों वाली तथा अनेक
की जन्मदात्री है, उसी विश्वरक्षिका देवी के उद्देश्य से हव्य प्रदान करो. (७)
या गुङ्गूर्या सिनीवाली या राका या सरस्वती.
इन्द्राणीमह्व ऊतये वरुणानीं स्वस्तये.. (८)
मैं अपनी रक्षा एवं सुख के लिए कई सिनीवाली, राका, सरस्वती, इंद्राणी और वरुणानी
को बुलाता हूं. (८)
सूक्त—३३ देवता—रुद्र
आ ते पितर्मरुतां सुम्नमेतु मा नः सूर्यस्य सन्दृशो युयोथाः.
अभि नो वीरा अर्वति क्षमेत प्र जायेमहि रुद्र प्रजाभिः.. (१)
हे मरुतों के पिता रुद्र! तुम्हारा दिया हुआ सुख हमें मिले. हमें सूर्य के दर्शन से अलग
मत करना. हमारे शक्तिशाली पुत्र युद्ध में शत्रुओं को हरावें. हे रुद्र! हम पुत्र-पौत्र आदि से
बहुत बनें. (१)
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