ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 511, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे मनुष्यो! जिसने उत्पन्न होते ही देवों एवं मनुष्यों में प्रथम स्थान प्राप्त करके अपने
वीर कर्म से देवों को विभूषित किया था, जिसके बल से धरती और आकाश डर गए थे और
जो विशाल सेना के नायक थे, वही इंद्र हैं. (१)
यः पृथिवीं व्यथमानामदृंहद्यः पर्वतान्प्रकुपिताँ अरम्णात्.
यो अन्तरिक्षं विममे वरीयो यो द्याम्स्तभ्नात्स जनास इन्द्रः.. (२)
हे मनुष्यो! जिसने चंचल पृथ्वी को दृढ़ किया, क्रोधित पर्वतों को नियमित किया,
विशाल अंतरिक्ष को बनाया एवं आकाश को स्थिर किया, वही इंद्र हैं. (२)
यो हत्वाहिरिणातसप्त सिन्धून्यो गा उदाजपधा वलस्य.
यो अश्मनोरन्तरग्निं जजान संवृक्समत्सु स जनास इन्द्रः.. (३)
हे मनुष्यो! जिसने वृत्र को मारकर सात नदियों को बहाया, जिसने बल असुर द्वारा
रोकी गई गायों को स्वतंत्र किया, जिसने दो बादलों के घर्षण से बिजली रूपी अग्नि को
उत्पन्न किया एवं जो युद्धस्थल में शत्रुओं का विनाश करता है, वही इंद्र हैं. (३)
येनेमा विश्वा च्यवना कृतानि यो दासं वर्णमधरं गुहाकः.
श्वघ्नीव यो जिगीवाँ लक्षमाददर्यः पुष्टानि स जनास इन्द्रः.. (४)
हे मनुष्यो! जिसने नश्वर संसार को बनाया है एवं जिसने विनाशक असुर को अंधेरी गुहा
में बंद किया, जिस प्रकार बहेलिया मारे हुए पशु को ले जाता है, उसी प्रकार जो जीते हुए
शत्रु का सब धन अधिकार में कर लेता है, वही इंद्र हैं. (४)
यं स्मा पृच्छन्ति कुह सेति घोरमुतेमाहुर्नैषो अस्तीत्येनम्.
सो अर्यः पुष्टीर्विजइवा मिनाति श्रदस्मै धत्त स जनास इन्द्रः.. (५)
हे मनुष्यो! जिसके विषय में लोग पूछते हैं कि वह कहां है? जिसके विषय में लोग
कहते हैं कि वह नहीं है. जो शत्रु की संपत्ति को नष्ट करता है, वही इंद्र हैं. उनके प्रति श्रद्धा
करो. (५)
यो रध्रस्य चोदिता यः कृशस्य यो ब्रह्मणो नाधमानस्य कीरेः.
युक्तग्राव्णो योऽविता सुशिप्रः सुतसोमस्य स जनास इन्द्रः.. (६)
हे मनुष्यो! जो संपन्न व्यक्ति को धन देता है, जो दीनदुर्बल अथवा प्रार्थना करते हुए
स्तोता को धन प्रदान करता है, जो शोभन हनु वाला, हाथ में पत्थर धारण करने वाले तथा
सोम निचोड़ने वाले यजमान की रक्षा करता है, वही इंद्र हैं. (६)
यस्याश्वासः प्रदिशि यस्य गावो यस्य ग्रामा यस्य विश्वे रथासः.
यः सूर्यं य उषसं जजान यो अपां नेता स जनास इन्द्रः.. (७)
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