ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ
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हे शरीर! जिस प्रकार नारियां घड़ों में जल भरकर ले जाती हैं, उसी प्रकार इक्कीस
मयूरियां एवं सात नदियां तुम्हारा विष दूर करें. (१४)
इयत्तकः कुषुम्भकस्तकं भिनद्म्यश्मना.
ततो विषं प्र वावृते पराचीरनु संवतः.. (१५)
हे शरीर! छोटा सा नकुल यदि तुम्हारा विष समाप्त नहीं करेगा तो मैं उसे पत्थर से मार
डालूंगा. इस प्रकार विष मेरे शरीर से निकलकर दूर दिशाओं में चला जाए. (१५)
कुषुम्भकस्तदब्रवीद्गिरेः प्रवर्तमानकः.
वृश्चिकस्यारसं विषम़रसं वृश्चिक ते विषम्.. (१६)
पर्वत से आने वाले नकुल ने कहा—“बिच्छू का विष बेकार है.” हे बिच्छू! तुम्हारा विष
प्रभावहीन है. (१६)