ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 489, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंदाहक एवं अदृश्य प्राणी मुझे घेरे हैं. (१)
अदृष्टान्हन्त्यायत्यथो हन्ति परायती. अथो अबघ्नती हन्त्यथो पिनष्टि पिंषती.. (२)
विषधर जीवों से काटे हुए के पास आकर ओषधि विष का प्रभाव नष्ट करती है एवं दूर
जाती हुई भी नष्ट करती है. उसे जब उखाड़ते हैं एवं पीसते हैं, तब भी वह विष का प्रभाव
नष्ट करती है. (२)
शरासः कुशरासो दर्भासः सैर्या उत.
मौञ्जा अदृष्टा बैरिणाः सर्वे साकं न्यलिप्तत.. (३)
शर, कुश, दर्भ, सैर्य, मुंज एवं वीरण नामक घासों में छिपे हुए विषधर मुझसे एक साथ
लिपट जाते हैं. (३)
नि गावो गोष्ठे असदन्नि मृगासो अविक्षत.
नि केतवो जनानां न्य१दृष्टा अलिप्तत.. (४)
जब गाएं गोशाला में बैठती हैं, हरिण निवासस्थान में बैठते हैं एवं मनुष्य निद्रा के कारण
ज्ञानशून्य होते हैं, उस समय अदृष्ट विषधर आकर मुझसे लिपट जाते हैं. (४)
एत उ त्ये प्रत्यदृश्रन्प्रदोषं तस्करा इव. अदृष्टा विश्वदृष्टाः प्रतिबुद्धा अभूतन.. (५)
वे चोरों के समान रात में देखे जाते हैं. वे किसी को दिखाई नहीं देते, पर सारे संसार को
देखते रहते हैं. सब लोग उनसे सावधान रहें. (५)
द्यौर्वः पिता पृथिवी माता सोमो भ्रातादितिः स्वसा.
अदृष्टा विश्वदृष्टास्तिष्ठतेलयता सु कम्.. (६)
हे सर्पो! आकाश तुम्हारा पिता, धरती माता, सोम भ्राता और अदिति तुम्हारी बहिन है.
तुम्हें कोई नहीं देख पाता, पर तुम सबको देखते हो. तुम अपने स्थान में रहो एवं सुखपूर्वक
गमन करो. (६)
ये अंस्या ये अङ्ग्याः सूचीका ये प्रकङ्कताः.
अदृष्टाः किं चनेह वः सर्वे साकं नि जस्यत.. (७)
जो जंतु स्कंध वाले, अंग वाले, सूची वाले एवं अत्यंत विषधारी हैं, ऐसे अदृष्ट विषधरों
का यहां कोई काम नहीं है. तुम सब यहां से एक साथ चले जाओ. (७)
उत्पुरस्तात्सूर्य एति विश्वदृष्टो अदृष्टहा.
अदृष्टान्सर्वाञ्जम्भयन्त्सर्वाश्च यातुधान्यः.. (८)
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