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सर्वकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 236, कुल 1855 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 236

अर्वाञ्चा वां सप्तयोऽध्वरश्रियो वहन्तु सवनेदुप.
इषं पृञ्चन्ता सुकृते सुदानव आ बर्हिः सीदतं नरा.. (८)
हे अश्विनीकुमारो! यज्ञसेवी सात घोड़े हमारे द्वारा अनुष्ठित तीनों सवनयज्ञों में तुम्हें ले
जावें. हे नेताओ! सुंदर दान करने वाले एवं शोभन कर्म करने वाले यजमान को अन्न देते हुए
तुम लोग कुशों पर बैठो. (८)
तेन नासत्या गतं रथेन सूर्यत्वचा.
येन शश्वदूहथुर्दाशुषे वसु मध्वः सोमस्य पीतये.. (९)
हे नासत्यो! तुमने सूर्यकिरण तुल्य तेजस्वी जिस रथ पर धन लाकर यजमान को सदा
दिया है, उसी रथ के द्वारा मधुर सोमरस पीने के लिए आओ. (९)
उक्थेभिर्वागवसे पुरूवसू अर्कैश्च नि ह्वयामहे.
शश्वत्कण्वानां सदसि प्रिये हि कं सोमं पपथुरश्विना.. (१०)
हम प्रभूत धन के स्वामी अश्विनीकुमारों को उक्थों एवं स्तोत्रों द्वारा अपने समीप बुलाते
हैं. हे अश्विनीकुमारो! तुमने कण्वपुत्रों के प्रिय यज्ञ में सदा सोमपान किया है. (१०)
सूक्त—४८ देवता—उषा
सह वामेन न उषो व्युच्छा दुहितर्दिवः.
सह द्युम्नेन बृहता विभावरि राया देवि दास्वती.. (१)
हे स्वर्गपुत्री उषा! हमारे धन के साथ प्रभात करो. हे विभावरी! पर्याप्त अन्न के साथ
प्रभात करो. हे देवि! तुम दानशील होकर पशुरूपी धन के साथ प्रभात करो. (१)
अश्वावतीर्गोमतीर्विश्वसुविदो भूरि च्यवन्त वस्तवे.
उदीरय प्रति मा सूनृता उषश्चोद राधो मघोनाम्.. (२)
हे अनेक अश्व सहित, अनेक गायों से युक्त एवं समस्त संपत्ति देने वाली उषादेवी! प्रजा
को सुख देने के लिए तुम्हारे पास अत्यंत धन है. तुम मुझ सत्य भाषण कर्त्ता को बल एवं
धनवानों का धन दो. (२)
उवासोषा उच्छाच्च नु देवी जीरा रथानाम्.
ये अस्या आचरणेषु दध्रिरे समुद्रे न श्रवस्यवः.. (३)
रथों को प्रेरणा देने वाली उषादेवी प्राचीन काल में प्रभात करती थी और अब भी प्रभात
करती है. जिस प्रकार धन के इच्छुक लोग समुद्र में नाव चलाते हैं, उसी प्रकार उषा के आने
पर रथ तैयार किए जाते हैं. (३)
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