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सर्वकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 187, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 187

पूषा राजानमाघृणि॒रप॑गूळ्हं॒ गुहा हितम्. अविन्दच्चित्रबर्हिषम्.. (१४)
प्रकाशवान् सूर्य ने गुफा में छिपाकर रखा हुआ, विचित्र कुशों से युक्त एवं तेजसंपन्न सोमरस प्राप्त किया. (१४)
उतो स मह्यमिन्दुभिः षड्युक्ताँ अनुसेषिधत्. गोभिर्यवं न चर्कृषत्.. (१५)
जिस प्रकार किसान बैलों के द्वारा बार-बार खेत जोतता है, उसी प्रकार सूर्य मेरे लिए क्रम से छः ऋतुएं लाए थे. ये ऋतुएं सोमरस से युक्त थीं. (१५)
अम्बयो यन्त्यध्वभिर्जामयो अध्वरीयताम्. पृञ्चतीर्मधुना पयः.. (१६)
जल हम यज्ञ की इच्छा करने वालों के लिए माता के समान हैं. वे हमारे हितकारी बंधु हैं. वे जल यज्ञमार्ग से जा रहे हैं. वे दूध को मीठा बनाते हैं. (१६)
अमूर्या उप सूर्ये याभिर्वा सूर्यः सह. ता नो हिन्वन्त्वध्वरम्.. (१७)
जो संपूर्ण जल सूर्य के समीप वर्तमान हैं अथवा सूर्य जिन जलों के समीप रहते हैं, वे सब जल हमारे यज्ञ का हित करें. (१७)
अपो देवीरुप ह्वये यत्र गावः पिबन्ति नः. सिन्धुभ्यः कत्वं हविः.. (१८)
हमारी गाएं जिस जल को पीती हैं, उसी का हम आह्वान कर रहे हैं. जो जल नदी के रूप में बह रहा है, उसे हवि देना हमारा कर्त्तव्य है. (१८)
अप्स्व१न्तरमृतमप्सु भेषजमपामुत प्रशस्तये. देवा भवत वाजिनः.. (१९)
जल के भीतर अमृत और ओषधियां वर्तमान हैं, हे ऋत्विजो! उत्साहपूर्वक उस जल की प्रशंसा करो. (१९)
अप्सु मे सोमो अब्रवीदन्तर्विश्वानि भेषजा.
अग्निं च विश्वशम्भुवमापश्च विश्वभेषजीः.. (२०)
सोम ने मुझसे कहा है कि जल में ओषधियां हैं, संसार को सुख प्रदान करने वाली अग्नि है और सभी प्रकार की जड़ीबूटियां हैं. (२०)
आपः पृणीत भेषजं वरूथं तन्वे३मम. ज्योक् च सूर्यं दृशे.. (२१)
हे जल! मेरे शरीर के लिए रोग नष्ट करने वाली ओषधियां पूर्ण करो. जिससे मैं बहुत समय तक सूर्य के दर्शन कर सकूं. (२१)
इदमपः प्र वहत यत्किं च दुरितं मयि.