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सर्वकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1854, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1854

को जानें. प्राचीन देव जिस प्रकार सम्मिलित होकर यज्ञ का भाग प्राप्त करते थे, उसी प्रकार
तुम भी मिलकर संपत्ति का भोग करो. (२)
समानो मन्त्रः समितिः समानी समानं मनः सह चित्तमेषाम्.
समानं मन्त्रमभि मन्त्रये वः समानेन वो हविषा जुहोमि.. (३)
पुरोहितों की स्तुतियां समान हों. ये लोग यज्ञ में एक साथ आवें. उनके मन और चित्त
भी समान हों. हे पुरोहितो! मैं एक ही मंत्र से तुम सबको अभिमंत्रित करता हूं और एक ही
प्रकार के हवि से तुम्हारा हवन करता हूं. (३)
समानी व आकूतिः समाना हृदयानि वः.
समानमस्तु वो मनो यथा वः सुसहासति.. (४)
हे यजमानो व पुरोहितो! तुम्हारा व्यवसाय समान हो. तुम्हारे हृदय समान हों व तुम्हारा
मन समान हो. तुम लोग एकरूप में संगठित बनो. (४)
(ऋग्वेद संहिता संपूर्ण)