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सर्वकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1817, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1817

सूक्त—१४१          देवता—विश्वेदेव
अग्ने अच्छा वदेह नः प्रत्यङ्नः सुमना भव.
प्र नो यच्छ विशस्पते धनदा असि नस्त्वम्.. (१)
हे अग्नि! हमारे सामने आकर उत्तम बातें कहो एवं हमारे प्रति प्रसन्न बनो. हे प्रजाओं के
स्वामी अग्नि! तुम धन देने वाले हो, इसलिए हमें धन दो. (१)
प्र नो यच्छत्वर्यमा प्र भगः प्र बृहस्पतिः.
प्र देवाः प्रोत सूनृता रायो देवी ददातु नः.. (२)
अर्यमा, भग, बृहस्पति, अन्य देव एवं सत्यरूपा सरस्वती देवी हमें धन दें. (२)
सोमं राजानमवसेऽग्निं गीर्भिर्हवामहे.
आदित्यान्विष्णुं सूर्य ब्रह्माणं च बृहस्पतिम्.. (३)
हम अपनी रक्षा के लिए राजा सोम, अग्नि, आदित्यगण, सूर्य, विष्णु, बृहस्पति एवं
प्रजापति को स्तुतियों द्वारा बुलाते हैं. (३)
इन्द्रवायू बृहस्पतिं सुहवेह हवामहे.
यथा नः सर्व इज्जनः सङ्गत्यां सुमना असत्.. (४)
हम शोभन आह्वान वाले इंद्र, वायु एवं बृहस्पति को इस यज्ञ में बुलाते हैं. ये सब
मिलकर हमें धन देने के लिए प्रसन्न हों. (४)
अर्यमणं बृहस्पतिमिन्द्रं दानाय चोदय.
वातं विष्णुं सरस्वतीं सवितारं च वाजिनम्.. (५)
हे स्तोता! अर्यमा, बृहस्पति, इंद्र, वायु, विष्णु, सरस्वती एवं शक्तिशाली सविता को दान
की प्रेरणा करो. (५)
त्वं नो अग्ने अग्निभिर्ब्रह्म यज्ञं च वर्धय.
त्वं नो देवतातये रायो दानाय चोदय.. (६)
हे अग्नि! तुम अन्य अग्नियों के साथ मिलकर हमारी स्तुतियों एवं यज्ञ को बढ़ाओ. तुम
हमारे यज्ञ के लिए दाताओं को धनदान की प्रेरणा दो. (६)
सूक्त—१४२          देवता—अग्नि
अयमग्ने जरिता त्वे अभूदपि सहसः सूनो नह्य१न्यदस्त्याप्यम्.
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