ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 177, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंइन्द्रं प्रातर्हवामह इन्द्रं प्रयत्यध्वरे. इन्द्रं सोमस्य पीतये.. (३)
मैं प्रत्येक यज्ञ में प्रातःकाल सोमपान के लिए इंद्र को बुलाता हूं. (३)
उप नः सुतमा गहि हरिभिरिन्द्र केशिभिः. सुते हि त्वा हवामहे.. (४)
हे इंद्र! अपने लंबे बालों वाले घोड़ों की सहायता से हमारे सोमरस के समीप आओ.
सोमरस निचुड़ जाने पर हम तुम्हें बुलाते हैं. (४)
सेमं नः स्तोममा गह्युपेदं सवनं सुतम्. गौरो न तृषितः पिब.. (५)
हे इंद्र! हमारे उस स्तोत्र को सुनकर यज्ञ के समीप आओ. सोमरस तैयार है. उसे ऐसे
पिओ, जैसे प्यासा हिरण पानी पीता है. (५)
इमे सोमास इन्दवः सुतासो अधि बर्हिषि. ताँ इन्द्र सहसे पिब.. (६)
हे इंद्र! यह पतला सोमरस बिछे हुए कुशों पर रखा है. इसे शक्ति बढ़ाने के लिए पिओ.
(६)
अयं ते स्तोमो अग्रियो हृदिस्पृगस्तु शंतमः. अथा सोमं सुतं पिब.. (७)
हे इंद्र! यह श्रेष्ठ स्तोत्र तुम्हारे लिए हृदयस्पर्शी एवं सुखदायक बने. उसके बाद तुम
निचोड़े हुए सोम को पिओ. (७)
विश्वमित्सवनं सुतमिन्द्रो मदाय गच्छति. वृत्रहा सोमपीतये.. (८)
वृत्रनाशक इंद्र प्रसन्नता प्राप्ति के निमित्त सोमरस पीने के लिए ऐसे सभी यज्ञों में जाते
हैं, जहां सोमरस तैयार हो. (८)
सेमं नः काममा पृण गोभिरश्वैः शतक्रतो. स्तवाम त्वा स्वाध्यः.. (९)
हे शतक्रतु! गाएं और अश्व देकर हमारी सभी अभिलाषाएं पूरी करो. हम भली प्रकार
ध्यान करते हुए तुम्हारी स्तुति करते हैं. (९)
सूक्त—१७ देवता—इंद्र एवं वरुण
इन्द्रावरुणयोरहं सम्राजोरव आ वृणे. ता नो मृळात ईदृशे.. (१)
मैं भली प्रकार प्रकाशमान इंद्र और वरुण से अपनी रक्षा की याचना करता हूं. वे दोनों
मुझ प्रार्थी की रक्षा करेंगे. (१)
गन्तारा हि स्थोऽवसे हवं विप्रस्य मावतः. धर्तारा चर्षणीनाम्.. (२)
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