ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1623, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे बहुतों द्वारा प्रशंसित इंद्र! जो दास, आर्य अथवा राक्षस हमारे साथ युद्ध करना चाहते
हैं. वे सब शत्रु तुम्हारी कृपा से हमारे द्वारा सरलता से हार जावें. हम तुम्हारी कृपा से उन्हें
युद्ध में मार डालें. (३)
यो दभ्रेभिर्हव्यो यश्च भूरिभिर्यो अभीके वरिवोविन्नृषाह्ये.
तं विखादे सस्निमद्य श्रुतं नरमर्वाञ्चमिन्द्रमवसे करामहे.. (४)
जो इंद्र मानव संहारक युद्ध में धन प्राप्त करते हैं, वे चाहे थोड़े मनुष्यों द्वारा पुकारे जावें
अथवा बहुतों द्वारा उन पर शुद्ध, सर्वत्र प्रसिद्ध एवं यज्ञ के नेता इंद्र को आज हम अपने
अनुकूल बनाते हैं. (४)
स्ववृजं हि त्वामहमिन्द्र शुश्रवानानुदं वृषभ रध्रचोदनम्.
प्र मुञ्चस्व परि कुत्सादिहा गहि किमु त्वावान्मुष्कयोर्बद्ध आसते.. (५)
हे अभिलाषापूरक इंद्र! हमने सुना है कि तुम स्वयं अपने बंधन काटने वाले, आशातीत
बल देने वाले एवं अपने भक्त के प्रेरक हो. तुम यहां आओ और कुत्स के बंधन से स्वयं को