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सर्वकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1349, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1349

वाले शत्रु के कार्यों को अलग करो. (४)
अर्थिनो यन्ति चेदर्थं गच्छानिद्ददुषो रातिम्. ववृज्युस्तृष्यतः कामम्.. (५)
यदि धन की अभिलाषा करने वाले धनी के पास जाते हैं तो उन्हें दान प्राप्त होता है एवं
मांगने वाले की अभिलाषा पूरी होती है. (५)
विदद्यत्पूर्व्यं नष्टमुदीमृतायुमीरयत्. प्रेमायुस्तारीदतीर्णम्.. (६)
जब कोई अपना प्राचीन काल में नष्ट हुआ धन प्राप्त करता है उस समय सोम उसे
यज्ञकार्य की प्रेरणा देते हैं एवं दीर्घ जीवन प्राप्त कराते हैं. (६)
सुशेवो नो मृळयाकुरदृप्तक्रतुरवातः. भवा नः सोम शं हृदे.. (७)
हे पिए हुए सोम! तुम हमारे हृदय में शोभन सुख वाले, सुखदाता सावधान बुद्धि वाले,
गतिहीन एवं कल्याणकारी होते हो. (७)
मा नः सोम सं वीविजो मा वि बीभिषथा राजन्. मा नो हार्दि त्विषा वधीः.. (८)
हे राजा सोम! हमें तुम चंचल अंग वाला एवं भयभीत मत बनाओ. तुम प्रकाश द्वारा
हमारे हृदय का वध मत करो. (८)
अव यत्स्वे सधस्थे देवानां दुर्मतीरीक्षे.
राजन्नप द्विषः सेध मीढ्वो अप स्रिधः सेध.. (९)
हे राजा सोम! तुम्हारे निवासस्थान में देवों की कोपबुद्धि प्रवेश न करे. तुम शत्रुओं को
दूर करो. सोमरस पिलाने वाले, हिंसकों को मारो. (९)
सूक्त—६९ देवता—इंद्र
नह्य१न्यं बळाकरं मर्डितारं शतक्रतो. तवं न इन्द्र मृळय.. (१)
हे इंद्र! मैं तुम्हारे अतिरिक्त किसी सुखदाता को नहीं मानता. तुम ही मुझे सुख
पहुंचाओ. (१)
यो नः शश्वत्पुरावित्थाऽमृध्रो वाजसातये. स त्वं न इन्द्र मृळय.. (२)
जिन हिंसारहित इंद्र ने प्राचीन काल में अन्न पाने के लिए हमारी रक्षा की थी, वह हमें
सदा सुखी करें. (२)
किमङ्ग रध्रचोदनः सुन्वानस्यावितेदसि. कुवित्स्विन्द्र णः शकः.. (३)
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