ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1328, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंऋज्राविन्द्रोत आ ददे हरी ऋक्षस्य सूनवि. आश्वमेधस्य रोहिता.. (१५)
राजपुत्र इंद्रोत से मैंने सरल गति वाले दो घोड़े प्राप्त किए हैं एवं ऋक्ष के पुत्र से हरे रंग
के तथा अश्वमेध के पुत्रों से लाल रंग के घोड़े पाए हैं. (१५)
सुरथाँ अतिथिग्वे स्वभीशूँराक्षै. आश्वमेधे सुपेशसः.. (१६)
मैंने अतिथिग्व के पुत्र इंद्रोत से सुंदर रथ वाले एवं ऋक्ष के पुत्र से सुंदर लगाम वाले
घोड़ों को पाया है. मैंने अश्वमेध से सुंदर घोड़े पाए हैं. (१६)
षळश्वाँ अतिथिग्व इन्द्रोते वधूमतः. सचा पूतक्रतौ सनम्.. (१७)
मैंने ऋक्ष एवं अश्वमेध के पुत्रों द्वारा दिए गए घोड़ों के साथ ही शुद्ध यज्ञकर्म वाले एवं
अतिथिग्व के पुत्र इंद्रोत द्वारा घोड़ियों सहित दिए गए घोड़ों को ग्रहण किया है. (१७)
ऐषु चेतद्वृषण्वत्यन्तर्ऋज्रेष्वरुषी. स्वभीशुः कशावती.. (१८)
इन सरल गति वाले घोड़ों में गर्भाधान योग्य घोड़ों से युक्त, शोभायमान एवं सुंदर लगाम
वाली घोड़ियां भी जान पड़ती हैं. (१८)
न युष्मे वाजबन्धवो निनित्सुश्चन मर्त्यः. अवद्यमधि दीधरत्.. (१९)
हे अन्न देने वाले छः राजाओ! निंदा करने वाला व्यक्ति भी तुम्हारे सामने निंदा का वचन
नहीं बोलता. (१९)
सूक्त-५८ देवता-वरुण
प्र वस्त्रिष्ठुभमिषं मन्दद्वीरायेन्दवे. धिया वो मेधसातये पुरन्ध्या विवासति.. (१)
हे अध्वर्युगण! तुम वीरों को हर्षित करने वाले इंद्र के लिए तीन स्तंभों से युक्त अन्न का
संग्रह करो. इंद्र परम बुद्धियुक्त यज्ञकर्म द्वारा यज्ञ आरंभ करने के लिए तुम्हारा सत्कार करते
हैं. (१)
नदं व ओदतीनां नदं योयुवतीनाम्. पतिं वो अघ्न्यानां धेनूनामिषुध्यसि.. (२)
हे यजमानो! उषाओं को उत्पन्न करने वाले, नदियों को शब्दायमान करने वाले एवं
अवध्य गायों के पालक इंद्र को बुलाओ. तुम गायों के दूध की इच्छा करते हो. (२)
ता अस्य सूददोहसः सोमं श्रीणन्ति पृश्नयः.
जन्मन्देवानां विशस्त्रिष्वारोचने दिवः.. (३)
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