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सर्वकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1253, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1253

करो. (२५)
सूक्त—२७ देवता—विश्वेदेवगण
अग्निुरुक्थे पुरोहितो ग्रावाणो बर्हिरध्वरे.
ऋचा यामि मरुतो ब्रह्मणस्पतिं देवाँ अवो वरेण्यम्.. (१)
इस स्तोत्रपूर्ण यज्ञ में अग्नि की स्थापना सोमरस कुचलने वाले पत्थरों एवं कुशों के
अगले भाग में हुई है. मैं मरुद्गण ब्रह्मणस्पति एवं अन्य देवों से वरण योग्य रक्षा की याचना
करता हूं. (१)
आ पशुं गासि पृथिवीं वनस्पतीनुषासा नक्त मोषधीः.
विश्वे च नो वसवो विश्ववेदसो धीनां भूत प्रावितारः.. (२)
हे अग्नि! तुम रात तथा दिन में हमारे यज्ञ के पशु, यज्ञभूमि, वनस्पति एवं ओषधियों के
समीप आते हो. हे निवासस्थान देने वाले विश्वेदेव! तुम हमारे यज्ञ कर्मों के रक्षक बनो. (२)
प्रसून एत्वध्वरो३ ग्ना देवेषु पूर्व्यः.
आदित्येषु प्र वरुणे धृतव्रते मरुत्सु विश्वभानुषु.. (३)
हमारा प्राचीन यज्ञ अग्नि तथा अन्य देवों के पास भली प्रकार जावे. हमारा यज्ञ
आदित्यों, व्रतधारी वरुण एवं सब ओर तेज फैलाने वाले मरुतों के समीप जावे. (३)
विश्वे हि ष्मा मनवे विश्ववेदसो भुवनवृधे रिशादसः.
अरिष्टेभिः पायुभिर्विश्ववेदसो यन्ता नोऽवृकं छर्दिः.. (४)
अधिक धन वाले एवं शत्रुनाशक विश्वेदेव मनु की वृद्धि करने वाले हों. हे सर्वज्ञ देवो!
दूसरों द्वारा अबाधित रक्षासाधनों द्वारा हमें चोर के भय से रहित घर दो. (४)
आ नो अद्य समनसो गन्तो विश्वे सजोषसः.
ऋचा गिरा मरुतो देव्यदिते सदने पस्त्ये महि.. (५)
हे विश्वेदेव! स्तोत्रों के प्रति समान विचार वाले एवं संगत होकर स्तुतिवचन एवं ऋचाएं
सुनने की अभिलाषा से आज हमारे पास आओ. हे मरुतो एवं महान् अदिति! हमारे यज्ञगृह
में आओ. (५)
अभि प्रिया मरुतो या वो अश्व्या हव्या मित्र प्रयाथन.
आ बर्हिरिन्द्रो वरुणस्तुरा नर आदित्यासः सदन्तु नः.. (६)
हे मरुद्गण! अपने प्यारे घोड़ों को हमारे यज्ञ में भेजो. हे मित्र! हव्य पाने के लिए हमारे