ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1198, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंसूक्त—८ देवता—अश्विनीकुमार
आ नो विश्वाभिरूतिभिरश्विना गच्छतं युवम्.
दस्रा हिरण्यवर्तनी पिबतं सोम्यं मधु.. (१)
हे दर्शनीय अश्विनीकुमारो! अपने सोने के रथ द्वारा सभी रक्षासाधनों को लेकर आओ
एवं मधुर सोमरस पिओ. (१)
आ नूनं यातमश्विना रथेन सूर्यत्वचा.
भुजी हिरण्यपेशसा कवी गम्भीरचेतसा.. (२)
हे हविभोक्ता, सोने से अलंकार धारण करने वाले, स्तुतियोग्य एवं प्रशंसनीय ज्ञान वाले
अश्विनीकुमारो! सूर्य के समान चमकीले रथ के द्वारा हमारे समीप आओ. (२)
आ यातं नहुषस्पर्यन्तरिक्षात् सुवृक्ति भिः.
पिबाथो अश्विना मधु कण्वानां सवने सुतम्.. (३)
हे अश्विनीकुमारो! हमारी शोभन स्तुतियां सुनकर तुम अंतरिक्षलोक से धरती पर आओ
एवं कण्वगोत्रीय ऋषियों के यज्ञ में निचोड़े हुए सोमरस को पिओ. (३)
आ नो यातं दिवस्पर्यन्तरिक्षादधप्रिया.
पुत्रः कण्वस्य वामिह सुषाव सोम्यं मधु.. (४)
हे मर्त्यलोक को प्रेम करने वाले अश्विनीकुमारो! स्वर्ग एवं अंतरिक्ष से आओ. कण्व
ऋषि के पुत्र ने यहां तुम्हारे लिए मधुर सोमरस निचोड़ा है. (४)
आ नो यातमपुश्रुत्यश्विना सोमपीतये.
स्वाहा स्तोमस्य वर्धना प्र कवी धीतिभिर्नरा.. (५)
हे अश्विनीकुमारो! सोम पीने के लिए हमारे इस स्तुतिपूर्ण यज्ञ में आओ. हे वृद्धि करने
वाले, कवि एवं नेता अश्विनीकुमारो! अपनी बुद्धि और कामों से स्तोता को बढ़ाओ. (५)
यच्चिद्धि वां पुर ऋषयो जुहुरेऽवसे नरा. आ यातमश्विना गंतमुपेमां सुष्टुतिं मम.. (६)
हे नेता अश्विनीकुमारो! पुराने समय में ऋषियों ने तुम्हें जब भी अपनी रक्षा के लिए
बुलाया, तब तुम आए थे. तुम मेरी इस शोभन स्तुति को सुनकर आओ. (६)
दिवश्चिद्रोचनादध्या नो गन्तं स्वर्विदा. धीभिर्वत्सप्रचेतसा स्तोमेभिर्हवनश्रुता.. (७)
हे सूर्य को जानने वाले अश्विनीकुमारो! तुम स्वर्ग एवं अंतरिक्ष से हमारे समीप आओ. हे
स्तोता को उत्तम ज्ञान देने वाले अश्विनीकुमारो! बुद्धि के साथ आओ. हे पुकार सुनने वाले