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सर्वकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1139, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1139

(८)
सूक्त—८७ देवता—वरुण
रदत्पथो वरुणः सूर्याय प्राणॉंसि समुद्रिया नदीनाम्.
सर्गो न सृष्टो अर्वतीर्ऋतायञ्चकार महीरवनीरहभ्यः.. (१)
वरुण ने सूर्य के लिए अंतरिक्ष में मार्ग दिया व सागर का जल सरिताओं को प्रदान
किया. घोड़ा जिस प्रकार घोड़ी के समीप जाता है, उसी प्रकार शीघ्रगमन के लिए वरुण ने
दिन से महान् रातों को अलग किया. (१)
आत्मा ते वातो रज आ नवीनोत्पशुर्न भूर्णिर्यवसे ससवान्.
अन्तर्मही बृहती रोदसीमे विश्वा ते धाम वरुण प्रियाणि.. (२)
हे वरुण! तुम्हारे द्वारा प्रेरित वायु जगत् की आत्मा है एवं जल को सब ओर भेजता है.
जैसे घास डालने पर पशु बोझा ढोता है, उसी प्रकार वायु अन्न पाकर विश्व का भरण करता
है. विस्तृत द्यावा-पृथिवी के मध्य में स्थित तुम्हारे सभी स्थान प्रिय हैं. (२)
परि स्पशो वरुणस्य स्मदिष्टा उभे पश्यन्ति रोदसी सुमेके.
ऋतावानः कवयो यज्ञधीराः प्रचेतसो य इषयन्त मन्म.. (३)
प्रशंसनीय गति वाले वरुण के सब सहायक शोभनरूप वाली द्यावा-पृथिवी को भली-
भांति देखते हैं. वे कर्मयुक्त, यज्ञ करने के लिए दृढ़, बुद्धिमान् एवं वरुण की स्तुति करने वाले
कवियों को भी देखते हैं. (३)
उवाच मे वरुणो मेधिराय त्रिः सप्त नामाघ्न्या बिभर्ति.
विद्वान्पदस्य गुह्या न वोचद्युगाय विप्र उपराय शिक्षन्.. (४)
वरुण ने मुझ मेधावी से कहा था कि धरती इक्कीस नाम धारण करती है. विद्वान् एवं
मेधावी वरुण ने मुझ अंतेवासी को उपदेश देते हुए ब्रह्मलोक की गुप्त बातों को भी बताया
है. (४)
तिस्रो द्यावो निहिता अन्तरस्मिन्तिस्रो भूमीरुपराः षड्विधानाः.
गृत्सो राजा वरुणश्चक्र एतं दिवि प्रेङ्खं हिरण्ययं शुभे कम्.. (५)
इन वरुण में तीन स्वर्ग, तीन भूमियां एवं छः दशाएं निहित हैं. प्रशंसनीय स्वामी वरुण ने
सुनहरे झूले के समान सूर्य को प्रकाश के लिए बनाया है. (५)
अव सिन्धुं वरुणो द्यौरिव स्थाद् द्रप्सो न श्वेतो मृगस्तुविष्मान्.
गम्भीरशंसो रजसो विमानः सुपारक्षत्रः सतो अस्य राजा.. (६)
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