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सर्वकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1094, कुल 1855 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 1094

हमारे शिपद नामक रोग को नष्ट करें एवं अहिंसक बनें. (४)
सूक्त—५१ देवता—आदित्य
आदित्यानामवसा नूतनेन सक्षीमहि शर्मणा शन्तमेन.
अनागास्त्वे अदितित्वे तुरास इमं यज्ञं दधतु श्रोषमाणाः.. (१)
हम आदित्यों के नवीन रक्षासाधनों द्वारा कल्याणकारी एवं अतिशय शांतिदायक घर
प्राप्त करें. शीघ्रता करने वाले आदित्य हमारी इस स्तुति को सुनकर यजमान को अपराध रति
एवं दरिद्रताहीन बनावें. (१)
आदित्यासो अदितिर्मादयन्तां मित्रो अर्यमा वरुणो रजिष्ठाः.
अस्माकं सन्तु भुवनस्य गोपाः पिबन्तु सोममवसे नो अद्य.. (२)
आदित्य, अदिति, अत्यंत सरल स्वभाव वाले मित्र, वरुण एवं अर्यमा प्रमुदित हों. संसार
के रक्षक देवगण हमारे ही रक्षक हों. वे आज हमारी रक्षा के लिए सोमरस पिएं. (२)
आदित्या विश्वे मरुतश्च विश्वे देवाश्च विश्व ऋभवश्च विश्वे.
इन्द्रो अग्निरश्विना तुष्टुवाना यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः.. (३)
हमने सब आदित्यों (१२), सब मरुतों (४९), सब देवों (३३३३), सब ऋभुओं (३), इंद्र,
अग्नि एवं अश्विनीकुमारों की स्तुति की. हे देवो! तुम अपने कल्याणसाधनों द्वारा हमारी रक्षा
करो. (३)
सूक्त—५२ देवता—आदित्य
आदित्यासो अदितयः स्याम पूर्देवत्रा वसवो मर्त्यत्रा.
सनेम मित्रावरुणा सनन्तो भवेम द्यावापृथिवी भवन्तः.. (१)
हे आदित्यो! हम अखंडनीय हों. हे वसु नामक रक्षक देवो! तुम मनुष्यों के पालक बनो.
हे मित्रावरुण! तुम्हारी सेवा करते हुए हम धन को भोगें. हे द्यावा-पृथिवी! तुम्हारी कृपा से हम
विभूतिसंपन्न हों. (१)
मित्रस्तन्नो वरुणो मामहन्त शर्म तोकाय तनयाय गोपाः.
मा वो भुजेमान्यजातमेनो मा तत्कर्म वसवो यच्चयध्वै.. (२)
मित्र एवं वरुण हमें प्रसिद्ध सुख दें एवं हमारे पुत्र-पौत्रों की रक्षा करें. दूसरे के किए हुए
अपराध का फल हम न भोगें. हे वसुओ! हम वह कर्म न करें, जिसके कारण तुम नाश कर
देते हो. (२)
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