ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1085, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंअन्य देव यज्ञ में हव्यों द्वारा प्राप्त करने योग्य एवं अभिलाषापूरक विष्णु के अंशरूप हैं.
रुद्र हमें अपना सुख एवं महत्त्व देते हैं. हे अश्विनीकुमारो! तुम हमारे हव्य वाले घर में आओ.
(५)
मात्र पूषन्नघृण इरस्यो वरूत्री यद्रातिषाचश्च रासन्.
मयोभुवो नो अर्वन्तो नि पान्तु वृष्टिं परिज्मा वातो ददातु.. (६)
हे दीप्तिशाली पूषा! सबकी वरणीय सरस्वती एवं दानकुशल देवपत्नियां इस यज्ञ में हमें
जो धन दें, उसका विघात मत करना. सुख देने वाले एवं गतिशील देव हमारी रक्षा करें एवं
सब ओर जाने वाले वायु हमें वर्षारूपी जल दें. (६)
नू रोदसी अभिष्टुते वसिष्ठैर्ऋतावानो वरुणो मित्रो अग्निः.
यच्छन्तु चन्द्रा उपमं नो अर्कं यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः.. (७)
वसिष्ठगोत्रीय ऋषियों ने आज धरती एवं आकाश की भली प्रकार स्तुति की है. उन्होंने
यज्ञ वाले वरुण, मित्र एवं अग्नि की भी स्तुति की है. प्रमुदित करने वाले देव हमें पूजा के
योग्य एवं सबसे अच्छा अन्न दें एवं कल्याणसाधनों द्वारा हमारी सदा रक्षा करें. (७)
सूक्त—४१ देवता—इंद्रादि
प्रातरग्निं प्रातरिन्द्रं हवामहे प्रातर्मित्रावरुणा प्रातरश्विना.
प्रातर्भगं पूषणं ब्रह्मणस्पतिं प्रातः सोममुत रुद्रं हुवेम.. (१)
हम स्तोता अग्नि, इंद्र, मित्र, वरुण एवं अश्विनीकुमारों को प्रातःकाल बुलाते हैं. हम
प्रातःकाल भग, पूषा, ब्रह्मणस्पति, सोम एवं रुद्र का आह्वान करते हैं. (१)
प्रातर्जितं भगमुग्रं हुवेम वयं पुत्रमदितेर्यो विधर्ता.
आध्रश्चिद्यं मन्यमानस्तुरश्चिद्राजा चिद्यं भगं भक्षीत्याह.. (२)
जो विश्व के धारक, जयशील, उग्र एवं अदितिपुत्र हैं, हम प्रातःकाल उन्हीं भगदेव को
बुलाते हैं. दरिद्र स्तोता एवं धनसंपन्न राजा दोनों ही भगदेव की स्तुति करते हुए कहते हैं
—“हमें भोग के योग्य धन दो.” (२)
भग प्रणेतर्भग सत्यराधो भगेमां धियमुदवा ददन्नः.
भग प्र णो जनय गोभिरश्वैर्भग प्र नृभिर्नृवन्तः स्याम.. (३)
हे भग! तुम उत्तम नेता एवं सत्यधन हो. हमें अभिलषित धन देकर हमारी स्तुति सफल
करो. हे भग! हमें गायों एवं घोड़ों द्वारा उन्नत बनाओ. हे भग! हम पुत्रादि द्वारा मनुष्यों वाले
हों. (३)
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