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सर्वकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1069, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1069

हे इंद्र! यह अधम धन तुम्हारा है. तुम मध्यम धन के स्वामी हो. तुम समस्त उत्तम धन के
राजा हो. यह बात सत्य है कि गो संबंधी दान देने से तुम्हें कोई रोक नहीं सकता. (१६)
त्वं विश्वस्य धनदा असि श्रुतो य ईं भवन्त्याजयः.
तवायं विश्वः पुरुहूत पार्थिवोऽवस्युर्नार्म भिक्षते.. (१७)
हे इंद्र! तुम विश्व को धन देने वाले हो. होने वाले युद्धों में भी तुम धनद के रूप में प्रसिद्ध
हो. हे बहुतों द्वारा बुलाए गए इंद्र! रक्षा के निमित्त सभी लोग तुमसे धन मांगते हैं. (१७)
यदिन्द्र यावतस्त्वमेतावदहमीशीय.
स्तोतारमिद्धिषिषेय रदावसो न पाप्त्वाय रासीय.. (१८)
हे इंद्र! जितने धन के तुम ईश्वर हो, उतने के ही हम भी स्वामी बनें. हे धन देने वाले इंद्र!
मैं धन से स्तोता की रक्षा करूंगा एवं पाप के लिए धन नहीं दूंगा. (१८)
शिक्षेयमिन्महयते दिवेदिवे राय आ कुहचिद्विदे.
नहि त्वदन्यन्मघवन्न आप्यं वस्यो अस्ति पिता चन.. (१९)
हे इंद्र! तुम्हारा पूजक पुरुष कहीं हो, मैं उसे प्रतिदिन दान दूंगा. हे धनी इंद्र! तुम्हारे
अतिरिक्त हमारा कोई भी जातीय एवं पिता नहीं है. (१९)
तरणिरित्सिषासति वाजं पुरन्ध्या युजा.
आ व इन्द्रं पुरुहूतं नमे गिरा नेमिं तष्टेव सुद्रवम्.. (२०)
शीघ्र कर्म करने वाला व्यक्ति महान् कर्म के सहारे अन्न का भोग करता है. जैसे बढ़ई
उत्तम लकड़ी की बनी पहिए की नेमि को झुकाता है, उसी प्रकार मैं बहुतों द्वारा बुलाए हुए
इंद्र को स्तुति द्वारा झुकाऊंगा. (२०)
न दुष्टुती मर्त्यो विन्दते वसु न स्रेधन्तं रयिर्नशत्.
सुशक्तिरिन्मघवन्तुभ्यं मावते देष्णं यत्पार्ये दिवि. (२१)
बुरी स्तुतियां करने वाला मनुष्य धन प्राप्त नहीं करता. धन हिंसक के पास भी नहीं
जाता. हे धनस्वामी इंद्र! स्वर्ग एवं भविष्य में मुझ जैसे व्यक्ति को जो देने योग्य है, उसे
उत्तमकर्म वाला ही पा सकता है. (२१)
अभि त्वा शूर नोनुमोऽदुग्धााइव धेनवः.
ईशानमस्य जगतः स्वर्दृशमीशानमिन्द्र तस्थुषः.. (२२)
हे शूर इंद्र! हम बिना दुही गाय के समान चमस में सोम भरकर तुम्हारी स्तुति करते हैं.
तुम जंगम प्राणियों एवं स्थिर पदार्थों के स्वामी एवं सबको देखने वाले हो. (२२)
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