ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1016, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंवाले सविता देव रात्रि की समाप्ति पर उठें. वे हव्यदाता यजमान के लिए बहुत सा अन्न दें.
(४)
उद् अयाँ उपवक्तेव बाहू हिरण्यया सविता सुप्रतीका.
दिवो रोहांस्यरुहत्पृथिव्या अरीरमतपतयत् कच्चिदध्वम्.. (५)
सविता व्याख्यानदाता के समान अपने स्वर्णमय एवं शोभन अवयवों वाले हाथों को
उठावें. वे धरती से आकाश के स्थानों में पहुंचें एवं सभी गतिशील वस्तुओं को आनंद दें. (५)
वाममद्य सवितर्वाममु श्वो दिवेदिवे वाममस्मभ्यं सावीः.
वामस्य हि क्षयस्य देव भूरेरया धिया वामभाजः स्याम.. (६)
हे सविता! हमें आज धन दो एवं कल भी धन देना. हमें प्रतिदिन धन दो. हे देव! तुम
निवास के कारणरूप विशाल धन के दाता हो. हम इस स्तुति द्वारा धन के भागी बनेंगे. (६)
सूक्त—७२ देवता—इंद्र व सोम
इन्द्रासोमा महि तद्वां महित्वं युवं महानि प्रथमानि चक्रथुः.
युवं सूर्यं विविदुथुर्युवं स्व१र्विश्वा तमांस्यहतं निदश्च.. (१)
हे इंद्र एवं सोम! तुम्हारा महत्त्व बड़ा है. तुमने महान् भूतों को बनाया था. तुमने सूर्य
और जल की खोज की है एवं सभी निंदकों व अंधकारों का नाश किया है. (१)
इन्द्रासोमा वासयथ उषामुत्सूर्यं नयथो ज्योतिषा सह.
उप द्यां स्कम्भथुः स्कम्भनेनाप्रथतं पृथिवीं मातरं वि.. (२)
हे इंद्र एवं सोम! तुम उषा को प्रकाशित करो एवं सूर्य को उसकी ज्योति के साथ ऊपर
उठाओ. तुम अंतरिक्ष के द्वारा स्वर्ग को स्थिर करो एवं पृथ्वी माता को प्रसिद्ध बनाओ. (२)
इन्द्रासोमावहिमपः परिष्ठां हथो वृत्रमनु वां द्यौरमन्यत.
प्रार्णांस्यैरयतं नदीनामा समुद्राणि पप्रथुः पुरूणि.. (३)
हे इंद्र एवं सोम! तुम जल को रोकने वाले वृत्र नामक राक्षस का वध करो. स्वर्ग ने तुम्हें
माना है. तुम नदियों के जल को प्रेरित करो व समुद्र को जल से भर दो. (३)
इन्द्रासोमा पक्वमामास्वन्तर्नि गवामिद्दधथुर्वक्षणासु.
जगृभतुरनपिनद्धमासु रुशच्चित्रासु जगतीष्वन्तः.. (४)
हे इंद्र एवं सोम! तुमने गायों के कोमल थनों में पुष्टिकारक दूध धारण किया है. तुमने
भिन्न-भिन्न रंग वाली गायों में किसी के द्वारा न रुकने वाला तथा श्वेतवर्ण का दूध धारण किया
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