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सर्वकोश
रत्नावली नाटिका (सम्राट हर्षवर्धन - शास्त्रीय नाटिका रत्न सम्पूर्ण ४ अङ्क सान्वय सटीक)

रत्नावली नाटिका (सम्राट हर्षवर्धन - शास्त्रीय नाटिका रत्न सम्पूर्ण ४ अङ्क सान्वय सटीक)

Ratnavali Natika of Emperor Harsha with Commentary

सम्राट हर्षवर्धन द्वारा

DevanagariHindipublished520 पृष्ठ

पृष्ठ 325, कुल 520 में से

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पृष्ठ 325

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280 रत्नावली
बावादेसित्ति¹ वेससारिस्समोहिदेण मए पिअवअस्सो एत्थ
आणीदो । जइ मम बअणं ण पत्तिआअसि ता पेक्ख इमं
लदापासं । ( इति लतापाशं दर्शयति ) (क)
वासवदत्ता—( सकोपम् ) हंजे कंचणमाले ! एदेण एव्व
लदापासेण बंधिअ गेण्ह एणं बम्हणं । एदं च दुट्ठकण्णअं²
अग्गदो करेहि । (ख)
काञ्चनमाला—जं भट्टिणी आणवेदि । ( इति लतापाशेन वसन्तअं³
गले बद्धा ताडयति ) इदास ! अणुभव दाब अत्तणो अविणअस्स⁴
फलं । देवीए दुब्बअणेहिं कडुइदाइं⁵ सोत्ताइन्ति सुमरेहि
तं बअणं । सागरिए ! तुमंपि अग्गदो होहि । (ग)
(क) भवति, त्वं किल आत्मानम् उद्दिश्य व्यापा