रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र २०७
बीज, मिश्री, आँवला और रतनजोत को समान भाग में लेकर
गो-दुग्ध में पीस २१ दिन तक पीने से यह रोग दूर हो जाता है ।
जब सोम प्रदर दूर हो जाय तब दोनों जीरे, काला अगर, केसर,
ककोड़ा, मोरशिखा इन औषधियों को बराबर बराबर लेकर बछड़ा
ब्यायी हुई गाय के दूध में पीस कर तीन दिन तक सेवन करना
चाहिए ।
यदि वन्ध्या स्त्री रजस्वला ठीक समय से हो, पर गर्भ धारण
न करे तो समझना चाहिए कि उसका आर्त्तव दूषित है । यदि
ऋतुकाल में जामुन के फल का सा काला रज निकले, कमर में
शूल हो, पेट में जलन रहे, हाथ-पैर गरम रहे तथा रुधिर भी
गरम निकले तो समझना चाहिए कि आर्त्तव पित्त दूषित है ।
कमलगट्टा, तगर, कूट, मुलहठी और सफेद चन्दन इनको समान
भाग में लेकर कूट डाले । बाद बकरी के दूध में पीस छान कर
ऋतुकाल में तीन दिन या जितने दिन आर्त्तव जारी रहे, पान करे ।
फिर लक्ष्मणा जड़ी को गाय के दूध में पीस छानकर बारह दिन
तक पान करे और सूँघे ।
यदि ऋतुकाल में खून बहुत सूक्ष्म गिरे और उसका रंग कुसुम
के रंग का हो, कटि तथा योनि में दर्द हो, ज्वर हो, तो वायु दूषित
आर्त्तव समझना चाहिए। आम की जड़ का छिलका, दोनों कटेरियों
की जड़, जामुन की जड़ का छिलका । इनको बराबर बराबर लेकर
गऊ के दूध में पीसकर ऋतुकाल में पीना चाहिए । बाद लक्ष्मणा