रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)
Raskhan Rachanavali with Hindi Commentary
रसखान (सैयद इब्राहिम) / पं. विद्यानिवास मिश्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें७४ रसखान-ग्रन्थावली
कदंब विटप के निकट तटनी के तट,
अटा चढ़ि चाहि पीत-पट फहरानि री ।
रस वरसावै तन तपनि बुझावै नैन,
आननि रिझावै वह आवै रसखानि री ।
३ 'नैननि बक बिसाल के वाननि झेलि सकै अस कौन नवेली ।
लोलत है हिय तीछन कोर मुमार गिरी तिय कोटिक हेली ।
छोडै नहीं छिनहूं रसखानि सु लागी फिरै द्रुम मों जनु वेली ।
रौरि परि छवि की ब्रजमडल कुंडल गंड'न कुंतल केली ॥'
४ 'बांकी बडी अँखियाँ वडरारे कपोल'न बोलनि की कल वानी ।
सुन्दर हास सुधानिधि सो मुख मूरति रंग सुधारस-सानी ।
ऐसी नवेली ने देखे कहूँ ब्रजराज लला अति ही सुखदानी ।
डोलति है बन वीथिन में रसखानि मनोहर रूप लुभानी ॥'
५. 'लाल लसै पगिया सब के पट कोटि सुगंधनि भीने ।
अंगनि अंग सजे सब ही रसखानि अनेक जराउ नवीने ।
मुकता गल माल लसै सबके सब ग्वार कुमार सिंगार सो कीने ।
पै सिगरे ब्रज वेहरि ही हरि ही के हरै हियरा हरि लीने ॥'
६ 'साँझ समै जिहि देखती ही तिहि पेखन का कौ मन यों 'ललकै री ।
ऊँची अटान चढ़ी ब्रजबाल सु लाज मनेह दुरै उझकै री ।
गोधन धूरि की धूँधरी मैं तिनकी छवि यों रसखानि तकै री ।
पावक के गिरि ते बुझि मानो धुँवा-लपटी लपटै लपकै री ॥'
जिस प्रकार रसखान ने कृष्ण के रूप का, सौन्दर्य का वर्णन किया है,
उसी प्रकार राधा के सौन्दर्य का भी विस्तार से वर्णन किया है । कुछ
उदाहरण प्रस्तुत है—
१. 'प्यारी की चाह सिंगार तरंगनि जाय लगी रति की दुति कूलनि ।
जोबन जेब कहा कहिये उर पै छवि मजु अनेक दुकूलनि ।