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रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)

रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)

Raskhan Rachanavali with Hindi Commentary

रसखान (सैयद इब्राहिम) / पं. विद्यानिवास मिश्र द्वारा

DevanagariBrajpublished368 पृष्ठ

पृष्ठ 61, कुल 368 में से

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४२ रसखान-ग्रन्थावली
अभाव के कारण यमुना के तल मे बैठ गई । उस आग के कारण जब यमुना का
पानी खौलने लगा तो उसकी गर्मी से पाताल-लोक मे स्थित शेषनाग भी जलने
लगा । पर ऐसे वर्णन परम्परागत ही समझने चाहिए ।
२७. सपत्नी भाव—इस प्रसग की अवतारणा नारियो के मन की स्वाभा-
विकता को चित्रित करने के लिए की गई है । नारी यह सहन नही कर सकती
कि उसके प्रिय को,अन्य कोई नारी भी प्रेम करे । यदि ऐसा होता है तो उसके
मन मे जलन होती है । इसी जलन को सपत्नी-भाव कहते है । कृष्ण-काव्य मे
कुब्जा को लेकर ही इस भाव की अभिव्यक्ति की गई है । रसखान ने भी
इस परम्परा का अनुसरण किया है । इनकी गोपियाँ उद्धव से कहती है कि हे
उद्धव ! उस आनन्द सागर कृष्ण के गुणो को सुनकर हमारा हृदय सौ-सौ टुकड़े
होकर फट गया है । हम नही जानती कि कौनसा मंत्र पढकर कुब्जा ने कृष्ण
पर चला दिया है । हम अपने मन मे विचार कर यह बात सत्य कहती है और
जानती है कि कृष्ण ने इस प्रकार से कितना यश प्राप्त किया है ? अर्थात् वे
बहुत बदनाम हो गये है, क्योकि ब्रज के सब नर-नारी यह कहते है कि कृष्ण
कुब्जा के दाम बन गए है । कही-कही यह सपत्नी-भाव आक्रोश के रूप मे फूट
पडा है । एक गोपी कहती है कि वह कुब्जा यहाँ पर होती तो उसे लात
घूँसे मारती और उसका शरीर चोट लेती । अपने हृदय का सारा गुस्सा निकाल
लेती और उमकी नाक को छेदकर उसमे कौडी पहना देती । उस रांड को मै
ऐसा नाच नचाती कि उसे कृष्ण को रिझाने का फल मिल जाता ।
२८ कुवलयापीड-वध—सभी कृष्ण भक्त-कवियो ने कृष्ण के अलौकिकत्व
का प्रतिपादन करने के लिए इस कथा का वर्णन किया है । रसखान ने इस
परम्परा का निर्वाह केवल एक छंद से ही कर दिया है ।
२६ उद्धव उपदेश—इस शीर्षक के अन्तर्गत रसखान के चार सवैये
उपलब्ध है । कथा परम्पागत है । उद्धव गोपियो को निर्गुण ब्रह्म का उपदेश
देने के लिए आते है और गोपियाँ उनकी परिहासपूर्ण भर्त्सना करती है ।
३० ब्रज-प्रेम—इस विषय के दो छंद रसखान के मिले है । कृष्ण को
द्वारिका मे रहकर ब्रज की याद आती है और वे अपनी वेदना की अभिव्यक्ति
अपनी रानी रुक्मणी से करते है ।