रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)
Raskhan Rachanavali with Hindi Commentary
रसखान (सैयद इब्राहिम) / पं. विद्यानिवास मिश्र द्वारा
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अधिक किया है ।
कृष्ण के सौन्दर्य के अतिरिक्त कवि ने राधा के सौन्दर्य का भी वर्णन
किया है । राधा के सौन्दर्य के उपमान और उन्हे प्रस्तुत करने की रीति प्राय.
परम्परागत है । यथा—
'कैधौ रसखान रस कोस दृग प्यास जानि,
आनि के पीयूष पूष कीनो विधि चंद घर ।
कैधो मनि मानिक बैठारिवो को कचन मै,
जरिया जोवन जिन गढ़िया सुघर घर ।
कैधौ काम कामना के राजत अधर चिन्ह,
कैधो यह भौर ज्ञान वोहित गुमान हर ।
एरी मेरी प्यारी द्युति कोटि रति रम्भा की,
वारि डारौ तेरी चित चोरिन चिबुक पर ।
इस कवित्त मे नेत्र, मुख, शरीर-गठन, अधरो की लाली, नासिका का छिद्र
और चिबुक की शोभा का वर्णन किया गया है । इनकी शोभा का वर्णन करने
के लिए जिन उपमानो की संयोजना की गई है वे सभी प्राय. परम्परागत हैं ।
'श्री मुख सौं न वखान सकै वृषभान सुनाजू को रूप उजारो ।
हे रसखान तू ज्ञान सभार तरैनि निहार जु रीझनहारो ।
चारु सिन्दूर को लाल रसाल लसै ब्रजवाल को भाल टिकारो ।
गोद मैं मानौ विराजत है घनस्याम के सारे की सारे को सारो ॥'
इस सवैये मे राधा के समस्त सौन्दर्य के साथ उसके मस्तक पर लगे हुए
सिन्दूर के टीके की शोभा का वर्णन किया गया है जो ऐसा प्रतीत होता है
मानो चन्द्रमा की गोद मे मगल सुशोभित हो ।
'अति लाल गुलाल दुकूल ते फूल अली ; अलि कुंतल राजत है ।
मखतूल समान के गुज छरानि मैं किसुक की छवि छाजत है ।
मुकता के कदम्ब ते अक के मौर सुने सुर कोकिल लाजत हैं ।
यह प्राननि प्यारी जु की रसखानि वसत-सी आज विराजत है ॥'
इस सौन्दर्य-वर्णन मे साग रूपक की योजना के द्वारा राधा को वसन्त
बताया गया है । कोई गोपी अपनी सखी से राधा के सौन्दर्य का वर्णन करती
है कि हे सखी ! राधा का अत्यन्त लाल गुलाल के समान दुकूल गुलाव के लाल
फूल की भाँति शोभायमान है । उसकी काली केश-राशि भोरो के समान सुशो-