रसिकप्रिया (महाकवि केशवदास - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी व्याख्या, नायिका-भेद एवं शृंगार मनोविज्ञान)

रसिकप्रिया (महाकवि केशवदास - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी व्याख्या, नायिका-भेद एवं शृंगार मनोविज्ञान)
Rasikapriya: Nayika Bheda, Shringara Rasa evam Saundarya Manovigyan
महाकवि केशवदास द्वारा
DevanagariHindipublished286 पृष्ठ
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( ४८ )
| विषय | छंदसंख्या | विषय | छंदसंख्या |
|---|---|---|---|
| धीरा | ४७ | श्रीकृष्णजू को प्रकाश चित्रदर्शन | ११ |
| अधीरा | ४८ | स्वप्नदर्शन-लक्षण | १२ |
| धीराधीरा | ४६ | श्रीराधिकाजूको प्रच्छन्न स्वप्नदर्शन | १३ |
| प्रौढ़ा-भेद चतुर्विध | ५० | श्रीकृष्णजूको प्रच्छन्न स्वप्नदर्शन | १४ |
| समस्तरसकोविदा | ५१-५२ | श्रीराधिकाजूको प्रच्छन्न श्रवण | १५ |
| विचित्रविभ्रमा | ५३-५४ | श्रीराधिकाजूको प्रकाश श्रवण | १६ |
| आक्रामितनायका | ५५-५६ | श्रीकृष्णजूको प्रच्छन्न श्रवण | १७ |
| लब्धायति | ५७-५८ | श्रीकृष्णजूको प्रकाश श्रवण | १८ |
| प्रौढ़ा-धीरा-लक्षण | ५६ | उपसंहार | १६ |
| प्रौढ़ा सादरा धीरा | ६० | ५ - | |
| आकृतिगुप्ता | ६१-६२ | दंपति-चेष्टा-वर्णन | १ |
| प्रौढ़ा अधीरा | ६३-६४ | श्रीराधिकाजू की सखी को वचन कृष्णप्रति | २ |
| प्रौढ़ा धीराधीरा | ६५-६६ | ||
| परकीया-लक्षण | ६७ | श्रीकृष्णजू को वचन राधिका की सखी प्रति | ३ |
| परकीया के भेद | ६८ | ||
| ऊढ़ा-अनूढ़ा-लक्षण | ६६ | चेष्टा-लक्षण | ४-८ |
| ऊढ़ा | ७० | श्रीराधिकाजू की प्रच्छन्न चेष्टा | ६ |
| अनूढ़ा | ७१ | श्रीराधिकाजू की प्रकाश चेष्टा | १० |
| अनूढ़ा-ऊढ़ा-वचन-लक्षण | ७२ | श्रीकृष्णजू की प्रच्छन्न चेष्टा | ११ |
| ऊढ़ा-वचन | ७३ | श्रीकृष्णजू की प्रकाश चेष्टा | १२ |
| उपसंहार | ७४ | स्वयंदूतत्व-लक्षण | १३ |
| ४ | श्रीराधिकाजूको प्रच्छन्न स्वयंदूतत्व | १४ | |
| दर्शन-लक्षण | १ | श्रीराधिकाजू को प्रकाश स्वयंदूतत्व | १५ |
| दर्शन के भेद | २ | श्रीकृष्णजू को प्रच्छन्न स्वयंदूतत्व | १६ |
| साक्षात् दर्शन | ३ | श्रीकृष्णजू को प्रकाश स्वयंदूतत्व | १७-१८ |
| श्रीराधिकाजू को प्रच्छन्न साक्षात् | ४ | ऊढ़ा को प्रियमिलन | १६-२१ |
| श्रीराधिकाजू को प्रकाश साक्षात् | ५ | अनूढ़ा की लज्जा | २२-२३ |
| श्रीकृष्णजू को प्रच्छन्न साक्षात् | ६ | प्रथम-मिलनस्थान | २४-२५ |
| श्रीकृष्णजू को प्रकाश साक्षात् | ७ | जनी के घर को मिलन | २६ |
| श्रीराधिकाजू कों प्रच्छन्न चित्रदर्शन | ८ | सहेली के घर को मिलन | २७ |
| श्रीराधिकाजू को प्रकाश चित्रदर्शन | ६ | धाइ के घर को मिलन | २८ |
| श्रीकृष्णजू को प्रच्छन्न चित्रदर्शन | १० |