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सर्वकोश
रसिकप्रिया (महाकवि केशवदास - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी व्याख्या, नायिका-भेद एवं शृंगार मनोविज्ञान)

रसिकप्रिया (महाकवि केशवदास - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी व्याख्या, नायिका-भेद एवं शृंगार मनोविज्ञान)

Rasikapriya: Nayika Bheda, Shringara Rasa evam Saundarya Manovigyan

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished286 पृष्ठ

पृष्ठ 40, कुल 286 में से

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पृष्ठ 40

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कि उस पर तिलक लिखा जाए । इस तिलक के लिखने में श्रीमोहनवल्लभजी
पंत ने आरंभ में हाथ बँटाया । पर तीन प्रभाव तक कार्य होने के अनंतर
वे अन्य कार्यगौरव से सहयोग नहीं दे सके । अपने बलबूते पर ही इसकी
परिपूति का मैंने संकल्प किया । इसकी पूति में मेरे प्रिय शिष्य श्रीबदरीप्रसाद
त्रिपाठी ने भी कुछ कार्य किया । उस समय श्री राजेंद्रप्रसाद ने इसकी प्रतिलिपि
करने में सोत्साह योग दिया ।
टीका की पद्धति लालाजी की ही रखी गई है । पर इसमें पाठांतर भी दे
दिए गए हैं । पाठांतरों के देने में किसी प्रति के नाम का उल्लेख नहीं किया
गया है । इसका प्रयोजन अनुसंधान नहीं है, आलोचना या टीका-टिप्पणी
है । इसी से केवल स्वीकृत पाठ के अतिरिक्त अन्य जितने पाठ मिले उनमें से
प्रमुख दे दिए गए हैं ।
टीका में कठिन शब्दों का अर्थ ‘शब्दार्थ’ शीर्षक से और तदनंतर सुसंगत
अर्थ ‘भावार्थ’ शीर्षक से दिया गया है । यथास्थान प्रमुख अलंकारों का निर्देश
है । ‘सूचना’ के अंतर्गत अन्य ज्ञातव्य चर्चा की गई है । जहाँ सरलता है वहाँ
केवल ‘शब्दार्थ’ दे दिया गया है