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सर्वकोश
रसिकप्रिया (महाकवि केशवदास - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी व्याख्या, नायिका-भेद एवं शृंगार मनोविज्ञान)

रसिकप्रिया (महाकवि केशवदास - सम्पूर्ण सविस्तार हिन्दी व्याख्या, नायिका-भेद एवं शृंगार मनोविज्ञान)

Rasikapriya: Nayika Bheda, Shringara Rasa evam Saundarya Manovigyan

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished286 पृष्ठ

पृष्ठ 114, कुल 286 में से

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पृष्ठ 114

११६ रसिकप्रिया
नायक—( तुम्हारी तो बात ही समझ में नहीं आती, तो भी यह बत-
लायो कि ) तुम्हारे हृदय में ( मेरे लिए ) प्रेम तो है न ?
नायिका—क्या जाने है या नहीं ।
नायक—इतने पर भी प्रेम नहीं है ।
नायिका—( मान लीजिए नहीं है ) तो क्या आप झगड़ा करेंगे ?
नायक—मुझसे अब ऐसा व्यवहार और ऐसी बातें कह रही हो ?
नायिका—जो मैंने कहा सो कहा । आप क्या कर लेंगे ?
सूचना—'नायिका के टेढ़े उत्तर सखियों को दिखाने के लिए हैं, वह
नायक को बतला रही है कि मेरी इच्छा विहार की है ।' ऐसा अर्थ सरदार ने
अपनी टीका में किया है। इसलिए 'अरिहौँ' का अन्य अर्थ 'सकोगे', 'गरे
परिहौँ' का अर्थ 'भेंटोगे', 'लरिहौँ' का 'विहार करोगे' आदि किया है।
अलंकार—गूढ़ोक्ति ।
अन्यच्च, यथा—( कबित्त )
(१५७) केसौदास घर घर नाचत फिरत गोप,
एक परे छकि ते मरेई गुनियत है ।
बारुनी के बस बलदाऊ भए सखा सब,
संग लै को जैये दुख सीस धुनियत है ।
मोहिं तौ गए ही बनै दीह दीपमाला पाइ,
गाइन संवारिबे को चित्त चुनियत है ।
जौ न बसौं लोलिनैनि लेरुवा मरहिं सब,
खरिक खरेई आज सूने सुनियत हैं। १८।
शब्दार्थ—छकि = नशे में चूर । बारुनी = मदिरा, शराब । दीहु
दीपमाला = बड़ी दीवाली । सँवारिबे कौं = एकत्र करने के लिए । चुनियत
है = चाहता है । लेरुवा = बछड़े । खरिक = गोशाला ।
भावार्थ—जितने गोप हैं घरघर नाचते फिरते हैं, वे नशा पी पीकर
ऐसे बेहोश हो गए हैं कि उन्हें मरा ही समझना चाहिए । बलदेव तथा सभी
सखा शराब के वश में हैं ( वे सब उसी के नशे में चूर हैं ) । अब मैं साथ में
लेकर जाऊँ भी तो किसे, इसी दुख से सिर पीट रहा हूँ । मेरे जाने से ही
बनेगा, बड़ी दीवाली 'श्रा गई । गायों को एकत्र करना ही उचित है । चंचल
नयनी, यदि मैं गोशाला में आकर नहीं बसता तो बछड़े सबके सब मर जाएँगे
क्योंकि गायों के भी न रहने से गोशाला में अत्यंत सन्नाटा है ।
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१८—एक—ऐसे । परे—रहे । भए—कीन्हें । लै को—लै कै, को लै । जैये—
जाउँ । दुख—काहि, देखे । गए हीँ—गहेई । दीह—देह । संवारिबे—सिगारिबे ।
बसौँ—मिलै, मेलौं । मरहिं०—मरेही प्यासे । खरिक—खरक, दखिक ।